सांविधानिक विकास ( Constitutional Development )

संविधान के विकास के महत्वपूर्ण चरण इस प्रकार हैं 1773 का विनियमन ( Regulating Act of 1773 ) 1784 का पिट्स इण्डिया अधिनियम ( Pitts India Act – 1784 ) … Read More

 19वीं शताब्दी में धार्मिक तथा समाज सुधार आंदोलन

आधुनिक शिक्षा तथा पाश्चात्य देशों के सम्पर्क से आधुनिक शिक्षा प्राप्त लोगों में सामाजित चेतना जागी । उन्होंने अनुभव किया कि रूढ़िवादिता व अन्धविश्वासों के कारण ही भारतीय समाज पिछड़ा हुआ है । इस जागृति के फलस्वरूप भारत में पुनर्जागरण की लहर चल पड़ी और समाज सुधार हेतु अनेक संगठनों ने आंदोलन चलाये ।

 18 वीं शताब्दी में हुए जन – आन्दोलन

संन्यासी विद्रोह में भाग लेने वाले संन्यासी ‘ शंकराचार्य ‘ के अनुयायी थे ।

बंकिम चन्द्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आनन्द मठ में संपासी विद्रोह के बारे में वर्णन किया ।

1858 के बाद ब्रिटिश शासन के विरूद्ध कृषक प्रतिरोध में एक खास परिवर्तन आया । अब किसानों ने अपनी माँगों के लिए सीधे – सीधे सरकार से लड़ाई प्रारम्भ की ।

18 वीं – 19 वीं शताब्दी में होने वाले विद्रोहों की एक खास बात यह थी कि वे सभी स्थानीय विद्रोह थे , जो स्थानीय समस्याओं से उपजे थे ।

UNESCO-World Heritage Sites of India-2021

The sites on the tentative list are: Satpura Tiger Reserve, Iconic riverfront of the historic city of Varanasi, Megalithic site of Hire Benkal, Maratha Military Architecture in Maharashtra, Bhedaghat-Lametaghat in … Read More

चौल राज्य ( महत्वपूर्ण बिंदु)

चोल राज्य (शासन-कला और वास्तु-कला) तंजौर (तंजावुर) चोल की राजधानी थी। चोल साम्राज्य तीन प्रशासनिक इकाइयों में विभक्त था- केंद्र सरकार। अस्थायी सरकार तथा स्थानीय सरकार। ‘उत्तरामेरुर अभिलेख’ चोल के प्रशासन का विवरण … Read More

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