जैन और बौद्ध धर्म

जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव थे । इन्हें इस धर्म का संस्थापक भी माना जाता है ।

जैन धर्म में कुल 24 तीर्थंकर हुए । महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर थे । इन्हें धर्म का वास्तविक संस्थापक माना जाता है ।

जैन धर्म में कर्मफल से छुटकारा पाने के लिए त्रिरत्न का पालन आवश्यक माना गया है । ये त्रिरत्न हैं- सम्यक् दर्शन , सम्यक् ज्ञान एवं सम्यक् आचरण ।

 भारत आये प्रमुख विदेशी यात्री

मेगस्थनीज ( 304–299 ई . पू . ) : यूनानी सम्राट सेल्यूकस निकेटर के दूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया । इसने भारत में प्राप्त अनुभवों को ‘ इंडिका ‘ नामक ग्रंथ में लेखबद्ध किया ।

पेरीप्लस ऑफ दि एरिथ्रियन सी ( 80 ई . ) : भारतीय तटीय प्रदेशों की यात्रा करने वाला अज्ञात यूनानी लेखक की रचना | इसमें दक्षिण भारतीय राजवंशों के साथ रोमन व्यापार एवं यहां के बंदरगाहों आदि का वर्णन है ।

टॉलमी ( द्वितीय शताब्दी ई . ) : यूनानी भूगोलवेत्ता जिसने ‘ जियोग्राफी ‘ नामक ग्रंथ की रचना की ।

सांविधानिक विकास ( Constitutional Development )

संविधान के विकास के महत्वपूर्ण चरण इस प्रकार हैं 1773 का विनियमन ( Regulating Act of 1773 ) 1784 का पिट्स इण्डिया अधिनियम ( Pitts India Act – 1784 ) … Read More

 18 वीं शताब्दी में हुए जन – आन्दोलन

संन्यासी विद्रोह में भाग लेने वाले संन्यासी ‘ शंकराचार्य ‘ के अनुयायी थे ।

बंकिम चन्द्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आनन्द मठ में संपासी विद्रोह के बारे में वर्णन किया ।

1858 के बाद ब्रिटिश शासन के विरूद्ध कृषक प्रतिरोध में एक खास परिवर्तन आया । अब किसानों ने अपनी माँगों के लिए सीधे – सीधे सरकार से लड़ाई प्रारम्भ की ।

18 वीं – 19 वीं शताब्दी में होने वाले विद्रोहों की एक खास बात यह थी कि वे सभी स्थानीय विद्रोह थे , जो स्थानीय समस्याओं से उपजे थे ।

  1857 का विद्रोह

1857 की ग्रीष्म ऋतु में लॉर्ड कैनिंग के वायसरॉय के कार्यकाल के दौरान यह घटना घटी । इसे 1857 का विद्रोह या सैन्य द्रोह अथवा पहला स्वाधीनता संग्राम भी कहा जाता है । मेरठ का विद्रोह तथा दिल्ली पर कब्जा , एक व्यापक सैन्य विद्रोह तथा पूरे उत्तरी तथा साथ ही मध्य तथा पश्चिमी भारत में विद्रोह की भूमिका तैयार हुई । दक्षिण शांत रहा तथा पंजाब व बंगाल इससे आंशिक रूप से प्रभावित हुए । कम्पनी के सिपाहियों की कुल संख्या 2,32,224 में से लगभग आधों ने अपने रेजीमेटल ‘ कलर ‘ के प्रति निष्ठा न रखने की घोषणा की तथा लम्बे समय से अनुशासन के एवं मेहनत से | तैयार की गई सेना की विचारधारा को तिलांजलि दे दी ।

ब्रिटिश भारत मे क्रषी अर्थव्यवस्था एवं प्रथाये

Taluqdari System

The term ‘taluqdar’ has different meanings in different parts of India. In Oudh, taluqdar is a great landholder.
But in Bengal, a taluqdar is next to zamindar in extent of land control and social status.
The big zamindars themselves had created many taluqs under several denominations, such as, junglburi taluq, mazkuri taluq, shikimi taluq, and so on.
These were created partly as a strategy of zamindari management and partly as a fiscal policy measure for raising zamindari funds for specific purposes.
After the Permanent Settlement, new varieties of taluqs were created by zamindars.
Under the pressure of the Permanent Settlement, many zamindars were creating dependent taluqs denominated as pattani taluq, noabad taluq and osat taluq.

Malguzari System

The land tenure prevailing in the erstwhile Central Provinces was known as Malguzari system in which the Malguzar was merely a revenue farmer under the Marathas.
When the Marathas came into power in this region, they farmed out the revenues of villages to persons of influence and wealth, who were called Malguzars.
During the British Rule, they were given proprietary rights and were held responsible for payment of revenue.
If the headman of a village was weak or was for any other reason, unable to answer for the sum the authorities expected, or if a court favourite wanted the village, the headman was replaced without hesitation by a farmer.
The farmer, or manager was at first called Mukaddam (the Hindi or Marathi form of Arabic Mugaddam).
Under the Malguzari system, the Lambardar/Sadar Lambardar appointed from among the Malguzars, was the revenue engager.
Other cultivators were either Absolute occupancy tenant, Occupancy tenant, Sub-tenant, Raiyat-Malik or lessees, who could be ejected from their holdings on various grounds. Malguzar (proprietor or co-sharer) held land under special description, namely, Sir land and Khudkasht land.

हरित आवास/ सतत आवास (Green Building)

“हरित भवन वह है जो कम पानी का उपयोग करता है, ऊर्जा दक्षता का अनुकूलन करता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है, कम अपशिष्ट उत्पन्न करता है और रहने वालों के लिए स्वस्थ स्थान प्रदान करता है। , एक पारंपरिक इमारत की तुलना में।

Seven Sister states- Importrant Facts

सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक निर्णय

फैसले ने विशाखा को कामकाजी महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए दिशा-निर्देश दिए।

इसने माना कि यौन उत्पीड़न महिलाओं की गरिमा और संविधान के अनुच्छेद 14, 15 (1), और (2) का उल्लंघन है।

बाद में संसद ने “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम 2013” तैयार किया।

जलवायु परिवर्तन- शब्दावली

प्राकृतिक या संशोधित पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा, संधारणीय प्रबंधन और पुनर्स्थापना हेतु किए गए कार्य यह कार्य सामाजिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से और अनुकूल रूप से समाधान करते हैं साथ ही मानव कल्याण और जैव विविधता के लिए लाभ प्रदान करते हैं।

एनएफटी (NFT) क्या है?

नॉन फंजिबल टोकन (NFT) एक यूनिक टोकन होता है, जो डिजिटल वैल्यू को जनरेट करते है। यह किसी भी फॉर्म (मूवी, डीवीडी, टीवी सीरीज) में मिल सकते है इसका हर … Read More

Difference between national park -sancturay

जैव प्रौद्योगिकी – आनुवंशिक अभियांत्रिकी – प्रक्रिया और अनुप्रयोग (Biotechnology-Genetic Engineering – Processess and Applications)

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) जीवों के जीवित एंजाइमों का उपयोग करके मनुष्यों के लिए उपयोगी उत्पादों और प्रक्रियाओं का उत्पादन करने की तकनीकों से संबंधित है। मुख्य रूप से दही, ब्रेड या वाइन बनाना, जो सभी सूक्ष्म जीव-मध्यस्थ प्रक्रियाएं हैं, को भी जैव प्रौद्योगिकी का एक रूप माना जा सकता है।

राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (National medical commission: NMC)

NMC की स्थापना राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम (NMC अधिनियम) 2019 के अंतर्गत की गई है जिसके द्वारा भारतीय आयुर्विज्ञान अधिनियम 1956 को निरस्त कर दिया गया है

जी -20 देश-एन ओवेरलूक

G-20 infographics

सिविल सर्विसेज़ बोर्ड (Civil Services Board : CSB)

उच्चतम न्यायालय ने ‘टी. एस. आर. सुब्रमण्यम और अन्य बनाम भारत संघवाद’ में एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए राज्य सरकारों तथा को यह आदेश दिया कि वे एक सिविल सर्विसेज बोर्ड (Civil Services Board : CSB) का गठन करें। ताकि नौकरशाहों के स्थानांतरण (Transfer), पदोन्नति की प्रक्रम (Promotion Process), पदस्थापन (Posting), सजा (punishment), पुरस्कार (reward), जांच व अनुशासनात्मक कार्यवाही (Disciplinary Action) जैसे विषयों का बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जा सके। इस प्रकार इससे सरकारी कार्यों में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही निश्चित हो सकेगी।

Indian Scientist

Birbal Sahni was a renowned paleobotanist of India, who studied the fossils of
the Indian subcontinent. Also a great geologist, Sahni is credited for establishing the Birbal Sahni Institute of Palaeobotany at Lucknow in the state of Uttar Pradesh.

प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक

सुश्रुत जी प्राचीन भारत के प्रसिद्ध सर्जन वैद्य थे । उन्होनें प्लास्टिक सर्जरी की प्रौद्योगिकी की विधि संसार को दी । सुश्रुत को सर्जरी का पिता कहा जाता है । सुश्रुत संहिता उनकी प्रसिद्ध पुस्तक है जो आज आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में विभिन्न सर्जन के यन्त्र प्रयोग किये जाते हैं , उनमें से 124 प्रकार के यन्त्र सुश्रुत जी ने ही विकसित किये थे

एनआरआई-ओसीआई-पीआईओ मे अंतर

ये भारतीय नागरिक ही हैं जो साधारण: भारत के बाहर निवास करता है और जिसके पास भारतीय पासपोर्ट है।

संविधान का बुनियादी ढांचा (सिद्धांत)

भारतीय संविधान की मूल संरचना (या सिद्धांत), केवल संवैधानिक संशोधनों पर लागू होती है जो यह बताती है कि संसद, भारतीय संविधानके बुनियादी ढांचे को नष्ट या बदल नहीं सकती है।
संविधान की मूल संरचना (सिद्धांत) के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय के कई महत्वपूर्ण निर्णय हैं।
संविधान की आधारभूत संरचना का तात्पर्य संविधान में निहित उन प्रावधानों से है, जो संविधान और भारतीय राजनीतिक और लोकतांत्रिक आदर्शों को प्रस्तुत करता है। संविधान के 24वें संशोधन पर विचार करते समय न्यायालय ने निर्णय दिया कि विधायिका अनु. 368 के तहत संविधान की मूल संरचना को नहीं बदल सकती।
संविधान, संसद और राज्य विधान मंडलों या विधानसभाओं को उनके संबंधित क्षेत्राधिकार के भीतर कानून बनाने का अधिकार देता है।

भारत के कीटभक्षी पौधे: ड्रोसेरा, पिचर प्लांट, यूट्रीकुलरिया (Insectivorous Plants of India: Drosera, Pitcher Plant, Utricularia)

कीटभक्षी पौधे (Insectivorous Plants) : ये पौधे कीड़ों को फँसाने में विशिष्ट हैं और लोकप्रिय रूप से कीटभक्षी पौधों के रूप में जाने जाते हैं। वे अपने पोषण के तरीके में सामान्य पौधों से बहुत अलग हैं। हालाँकि, वे कभी भी मनुष्यों या बड़े जानवरों का शिकार नहीं करते हैं। कीटभक्षी पौधों को उनके शिकार को फंसाने की विधि के आधार पर सक्रिय और निष्क्रिय प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है। जैसे ही कीट उन पर उतरते हैं, सक्रिय लोग अपने पत्तों के जाल को बंद कर सकते हैं। निष्क्रिय पौधों में एक ‘नुकसान’ तंत्र (Pitfall Mechanism) होता है, जिसमें किसी प्रकार का जार या घड़े जैसी संरचना होती है जिसमें कीट फिसल कर गिर जाता है, अंततः पच जाता है

IAS PT Solved 2020- Indian Polity

Q19.   Rajya Sabha has equal powers with Lok Sabha in            (a)  the matter of creating new All India Services            (b)  amending the Constitution            (c)  the removal of … Read More

IAS PT Solved 2020-Indian Geography

With reference to pulse production in India, consider the following statements:

IAS PT Solved 2020-GS-1, India & World Geography

Which of the following Protected Areas are located in Cauvery basin?

निजी डेटा  प्रोटेक्शन बिल 2021- (360’Analysis)

डेटा सुरक्षा शब्द का अर्थ है संग्रहीत डेटा के उपयोग और उपयोग पर कानूनी नियंत्रण। दूसरे शब्दों में, यह किसी की गोपनीयता में घुसपैठ को कम करने के लिए निरंतर और दोहराव वाली प्रक्रियाओं, ध्वनि नीतियों और गोपनीयता कानूनों की एक श्रृंखला को संदर्भित करता है।

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