ब्रिटिश भारत मे क्रषी अर्थव्यवस्था एवं प्रथाये

Taluqdari System

The term ‘taluqdar’ has different meanings in different parts of India. In Oudh, taluqdar is a great landholder.
But in Bengal, a taluqdar is next to zamindar in extent of land control and social status.
The big zamindars themselves had created many taluqs under several denominations, such as, junglburi taluq, mazkuri taluq, shikimi taluq, and so on.
These were created partly as a strategy of zamindari management and partly as a fiscal policy measure for raising zamindari funds for specific purposes.
After the Permanent Settlement, new varieties of taluqs were created by zamindars.
Under the pressure of the Permanent Settlement, many zamindars were creating dependent taluqs denominated as pattani taluq, noabad taluq and osat taluq.

Malguzari System

The land tenure prevailing in the erstwhile Central Provinces was known as Malguzari system in which the Malguzar was merely a revenue farmer under the Marathas.
When the Marathas came into power in this region, they farmed out the revenues of villages to persons of influence and wealth, who were called Malguzars.
During the British Rule, they were given proprietary rights and were held responsible for payment of revenue.
If the headman of a village was weak or was for any other reason, unable to answer for the sum the authorities expected, or if a court favourite wanted the village, the headman was replaced without hesitation by a farmer.
The farmer, or manager was at first called Mukaddam (the Hindi or Marathi form of Arabic Mugaddam).
Under the Malguzari system, the Lambardar/Sadar Lambardar appointed from among the Malguzars, was the revenue engager.
Other cultivators were either Absolute occupancy tenant, Occupancy tenant, Sub-tenant, Raiyat-Malik or lessees, who could be ejected from their holdings on various grounds. Malguzar (proprietor or co-sharer) held land under special description, namely, Sir land and Khudkasht land.

हरित आवास/ सतत आवास (Green Building)

“हरित भवन वह है जो कम पानी का उपयोग करता है, ऊर्जा दक्षता का अनुकूलन करता है, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करता है, कम अपशिष्ट उत्पन्न करता है और रहने वालों के लिए स्वस्थ स्थान प्रदान करता है। , एक पारंपरिक इमारत की तुलना में।

Difference between national park -sancturay

एनआरआई-ओसीआई-पीआईओ मे अंतर

ये भारतीय नागरिक ही हैं जो साधारण: भारत के बाहर निवास करता है और जिसके पास भारतीय पासपोर्ट है।

निजी डेटा  प्रोटेक्शन बिल 2021- (360’Analysis)

डेटा सुरक्षा शब्द का अर्थ है संग्रहीत डेटा के उपयोग और उपयोग पर कानूनी नियंत्रण। दूसरे शब्दों में, यह किसी की गोपनीयता में घुसपैठ को कम करने के लिए निरंतर और दोहराव वाली प्रक्रियाओं, ध्वनि नीतियों और गोपनीयता कानूनों की एक श्रृंखला को संदर्भित करता है।

विभिन्न योजनाए

12 नवंबर 2020 को हमारे देश के वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी के द्वारा आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना का आरंभ किया गया है। इस योजना को कोविड-19 काल से उभर रहे भारत में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए आरंभ किया गया है। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा उन सभी प्रतिष्ठानों को सब्सिडी प्रदान की जाएगी जो नई भर्तियां करेंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य नए रोजगार को प्रोत्साहन देना है।

अक्षय ऊर्जा दिवस : 20 अगस्त

अक्षय ऊर्जा दिवस (नवीकरणीय ऊर्जा दिवस) हर साल 20 अगस्त को भारत में अक्षय ऊर्जा के विकास और अपनाने के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। अक्षय … Read More

बिरसा किसान योजना (Birsa Kisan Yojana)

उद्देश्य (Objectives) फर्जी किसानों की पहचान करना पात्र किसानों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना बिचौलिए को खत्म करना कृषि विभाग जुटा रही है किसानों का डाटा सरकार बिरसा किसान … Read More

ई-रुपया डिजिटल भुगतान (e-Rupi Digital Payment)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और इसके तहत होने वाले लेन-देन को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से पिछले सात वर्षों में कई क्रांतिकारी व युगान्तकारी कदम उठा चुके हैं। “ई-रुपया” डिजिटल पेमेंट सिस्टम उनमें से एक और बिल्कुल नया है। इसके लिए लोगों को इंटरनेट बैंकिंग या कार्ड आदि की जरूरत नहीं होगी। पीएम मोदी ने इसे लोगों तक सरकारी सेवाओं का फायदा पहुंचने के लिए लॉन्च किया है। यह देश की अपनी डिजिटल करेंसी के रूप में भारत का पहला कदम है। ई-रुपया की लांचिंग से देश में डिजिटल पेमेंट्स में डिटिजल करेंसी को लेकर कितनी क्षमता है, इसका आकलन किया जा सकेगा।

भारतीय अर्थव्यस्था 2021 ( मुख्य परीक्षा आईएएस-पीसीएस हेतु )

अन्तर्राष्ट्रीय संबंधों पर कोविड महामारी का प्रभाव (Impact of COVID Pandemic on International relations )

लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के इंस्टिट्यूट ऑफ़ ग्लोबल अफ़ेयर्स की सोफिया गैस्टन ने बीबीसी से कहा था की, “इस महामारी के वक़्त तमाम देशों से ये उम्मीद थी कि वो इसे साझा चुनौती मान कर आपस में सहयोग करेंगे, ताकि इस संकट का मुक़ाबला कर सकें। पर, हो ये रहा है कि तमाम देश अपने निजी हितों को तरज़ीह दे रहे हैं और सहयोग के बजाय एक दूसरे से होड़ में लग गए हैं। ” इस वक्तव्य में काफी हद तक सच्चाई है।

विश्व व्यापार संगठन-ई-कॉमर्स और भारत

विश्व व्यापार संगठन-ई-कॉमर्स  और भारत विवाद? कई देशों ने इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स के व्यापार संबंधी पहलुओं पर विश्व व्यापार संगठन वार्ता शुरू करने का इरादा व्यक्त किया है। विकसित देश ई-कॉमर्स … Read More

क्या है ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स?

विश्व की समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-7 ने जून 2021 के प्रथम सप्ताह में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया।  सात देशों के इस समूह के वित्त मंत्रियों की बैठक में  सैद्धांतिक रूप से वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर दर यानी ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स (global minimum corporate tax rate) की पुष्टि करने के लिए सहमत हुए।

ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स पर सहमति (6.06.21 डेली करंट अफेयर्स)

जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की लन्दन बैठक में बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर कर वैश्विक न्यूनतम कर (global minimum corporate tax) लगाने पर ऐतिहासिक” सहमति बनी है।
इस बैठक में दो निर्णय लिए गए हैं। पहला निर्णय जिसकी पुष्टि की गई है, वह यह कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां  जहां वे काम करती हैं, वहां करों का भुगतान करने के लिए मजबूर हैं। समझौते में दूसरा निर्णय विभिन्न देशों को एक-दूसरे से आर्थिक तौर पर टैक्स मुद्दे  बचने के लिए 15% की ग्लोबल मिनिमम  कॉर्पोरेट कर दर के लिए प्रतिबद्ध करता है।

Gig Economy

Gig employees take short-term contracts and will be paid for that. Examples – Food delivery boy, Uber / Ola cab driver, musician, photographer, construction worker, on-demand worker etc. There are many apps and websites (Ex-Fiverr, Upwork) for skilled workforce to take gigs, such as software developers, doctors, etc. Such freelance work market is called gig economy.

वि-भूमण्डलीकरण प्रक्रिया (De-globalization process)

विभूमण्डलीकरण का अर्थ है वैश्वीकरण से विपरीत दिशा में वापसी, यानी वैश्वीकरण से पुनः राष्ट्रवाद के रास्तों पर लौटना। मंदी के पश्चात् के परिदृश्य में दुनिया वैश्वीकरण की दिशा से … Read More

Indian Economy -A Snapshot

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