भारत आये प्रमुख विदेशी यात्री

मेगस्थनीज ( 304–299 ई . पू . ) : यूनानी सम्राट सेल्यूकस निकेटर के दूत के रूप में चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया । इसने भारत में प्राप्त अनुभवों को ‘ इंडिका ‘ नामक ग्रंथ में लेखबद्ध किया ।

पेरीप्लस ऑफ दि एरिथ्रियन सी ( 80 ई . ) : भारतीय तटीय प्रदेशों की यात्रा करने वाला अज्ञात यूनानी लेखक की रचना | इसमें दक्षिण भारतीय राजवंशों के साथ रोमन व्यापार एवं यहां के बंदरगाहों आदि का वर्णन है ।

टॉलमी ( द्वितीय शताब्दी ई . ) : यूनानी भूगोलवेत्ता जिसने ‘ जियोग्राफी ‘ नामक ग्रंथ की रचना की ।

फाह्यान ( 401 – 411 ई . ) : सम्राट चंद्रगुप्त II के शासन काल में भारत की यात्रा पर आने वाला प्रथम चीनी बौद्ध भिक्षु ।

कॉस्मस इंडिकोप्लेस्टेज ( 530-550 ई . ) : यूनानी भिक्षु जिसके ग्रंथ ‘ क्रिश्चियन टोपोग्राफी ‘ से भारतीय अर्थ व्यवस्था का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है

ह्वेनसांग ( 629 – 44 ई . ) : सम्राट हर्षवर्धन के शासन काल में भारत की यात्रा पर आने वाला चीनी बौद्ध भिक्षु । इसके भारत में प्राप्त अनुभव को ‘ सि- यू- की ‘ नामक ग्रंथ में प्रस्तुत किया है । इसे ‘ तीर्थेयात्रियों का राजकुमार ‘ भी कहा गया है ।

इत्सिंग ( 671-95 ई . ) : चीनी बौद्ध तीर्थयात्री जिसने ‘ बायोग्राफीज़ ऑफ इमिनेंट मांक्स ( प्रमुख बौद्ध भिक्षुओं की आत्मकथायें ) नामक ग्रंथ में भारत की दशा का भी वर्णन किया है ।

इब्न खुर्दादब ( 864 ई . ) : अरब भूगोलवेत्ता जिसने अपने ग्रंथ ‘ किताबुल मसालिक वल ममालिक ‘ में भारत की अंतसंचार व्यवस्था का विवरण दिया है ।

अलमसूदी ( 957 ई . ) : अरब यात्री जिसका ग्रंथ ‘ महजुल जहाब ‘ पश्चिमी भारत के इतिहास के लिए उपयोगी ।

मुहम्मद इब्न अहमद अलबरुनी ( 1024-30 ई . ) : महमूद गजनवी के साथ भारत आने वाला अरबी यात्री । अपनी पुस्तक ‘ किताबुल हिंद ‘ में भारत का विस्तृत वर्णन किया है ।

चाऊ – जु – कुआ ( 1225 – 95 ई . ) : चीनी व्यापारी जिसकी पुस्तक ‘ चु- फान- ची ‘ में दक्षिण भारत और चीन के व्यापारिक संबंध का उल्लेख है ।

शिहाबुद्दीन अल उमरी ( 13 वीं शताब्दी ) : सीरिया से आये इस यात्री ने ‘ मसालिक- अल- अबसार- फी- ममालिक उल- अमसार ‘ नामक पुस्तक में भारत के साथ व्यापारिक संबंधों की चर्चा की है ।

मार्कोपोलो ( 1292-94 ई . ) : वेनिस ( इटली ) से आये इस यात्री ने ‘ सर मार्कोपोलो की पुस्तक ‘ में दक्षिण भारत की का स्वाभाविक वर्णन किया है । इसे मध्यकालीन यात्रियों का राजकुमार कहा गया है ।

शेख फकह अबू अब्दुल्ला इब्नबतूता ( 1 333 – 47 ई . ) सुल्तान मुहम्मद तुगलक के शासनकाल में आने वाले मोरोक्को ( अफ्रीका ) निवास इब्नबतूता ने ‘ रेहला ‘ नामक ग्रंथ में समकालीन भारत का वृहत वर्णन किया है ।

निकोलो कोन्टी ( 1420-21 ई . ) : विजयनगर साम्राज्य की यात्रा करने वाले प्रथम इतालवी यात्री देवराय प्रथम के शासनकाल में भारत पहुंचा । उसने विजयनगर की दशा का वास्तविक वर्णन किया है ।

अब्दुर्रज्जाक ( 1443-44 ई . ) : फारस के सम्राट शाहरूख के दूत के रूप में कालीकट के जमोरिन के दरबार में पहुंचा । 1443 में इसने विजयनगर सम्राट देवराय II के शासनकाल में वहां की यात्रा की । उसने विजयनगर शहर का अत्यंत सजीव चित्रण किया है तथा इसे विश्व का सबसे अद्भुत और बड़ा नगर बताया ।

एथेनेसियस निकितिन ( 1470-74 ई . ) : रूसी घोड़ों के सौदागर ने बहमनी के सुल्तान मुहम्मद III के शासनकाल में बीदर की यात्रा की और वहां की दशा का वर्णन किया ।

दुआर्ते बारबोसा( 1500-16 ई . ) : पुर्तगाली अधिकारी जिसने कृष्णदेवराय के समय विजयनगर की यात्रा की । दो खंडों में लिखी अपनी पुस्तक ‘ दुआर्ते बारबोसा की पुस्तक ‘ में विजयनगर तथा अन्य दक्षिणी राज्यों की स्थिति का वर्णन  किया है । इसने पुर्तगाली गवर्नर फ्रांसिस अलबुकर्क के दुभाषिये का कार्य भी किया ।

लुडोविको डि बार्थेमा ( 1502-08 ई . ) : पुर्तगाल यात्री ने अपनी पुस्तक ‘ लुडोविको डि बार्थेमा का यात्रा वृतांत ‘ में गोआ और कालीकट के पश्चिमी तट के साथ – साथ विजयनगर साम्राज्य का अतयंत रोचक वर्णन किया है ।

डोमिंगो पायज ( 1520-22 ई . ) : पुर्तगाली यात्री ने विजयनगर सम्राट कृष्णदेव राय के शासनकाल में वहाँ की यात्रा की । ‘ डोमिंगो पायज की कथा ‘ नामक पुस्तक में इसने इस राज्य का विशद् वर्णन किया है । इसने विजयनगर शहर को रोम के समान वैभवशाली पाया ।

फर्नाओ नूनिंज ( 1535-37 ई . ) : पुर्तगाली घोड़ों के व्यापारी ने अच्युतराय के शासनकाल में विजयनगर की यात्रा की और अपने अनुभव ‘ क्रॉनकल ऑफ फर्नास ( फर्नाओं ) नूनिंज ‘ नामक पुस्तक में लेख बद्ध किये ।

सीजर फ्रेडरिक ( 1567-68 ई . ) पुर्तगाली यात्री ने तालिकोट के युद्ध ( 1565 ई . ) के बाद विजयनगर की यात्रा की और इसके विनिष्ट वैभव का उल्लेख किया

राल्फ फिच ( 1583–91 ई . ) : भारत आने वाले प्रथम अंग्रेज  यात्री ने 16 वीं शताब्दी के केन्द्रों उत्तरार्द्ध के व्यापारिक तथा नागर का मुल्यवान विवरण प्रस्तुत किया ।

विलयम हाकिंस ( 1608-11 ई . ) : मुगल सम्राट के दरबार में ब्रिटिश शासक जेम्स I के दूत के रूप में आने वाले अंग्रेज यात्री ने समकालीन भारतीय दशा का उचित वर्णन किया है इसे जहांगीर ने 400 घोड़ों का मनसब दिया ।

सर टामस रो ( 1615-19 ई . ) : जहांगीर के दरबार में आने वाला दूसरा अंग्रेज दूत जिसे मुगल सम्राट से व्यापार का फरमान प्राप्त हुआ । इसने अपने यात्रा विवरण पूर्वी द्वीपों की यात्रा में मुगल दरबार का वास्तविक वर्णन किया है ।

पीत्रो डेलावेली ( 1623 – 26 ई . ) : इटली से आने वाले इस यात्री ने भारत के तटीय प्रदेशों की विस्तृत यात्रा की तथा कोंकण , मालाबार , कैम्बे ( खंभात ) के धार्मिक उत्सवों , पशु अस्पतालों आदि का वर्णन किया ।

पीटर मुण्डी ( 1630-34 ई . ) : मुगल सम्राट शाहजहां के काल में भारतआने वाले इस इतावली यात्री ने ( 1630–32 ई . ) के बीच पड़े भीषण अकाल और राज्य द्वारा उठाये गये कदमों का उल्लेख किया ।

जीन बैपटिस्ट ट्रैवनियर ( 1638 – 63 ई . ) : फ्रांसीसी यात्री ( 1638–1663 ई . ) के बीच 6 बार भारत की यात्रा की । अपने यात्रा विवरण ‘ ट्रैवल्स इन इंडिया ‘ में शाहजहां और औरंगजेब के शासनकाल का विवरण दिया है । हीरे का व्यापारी होने के कारण इसने हीरे के व्यापार और खनिजों का विस्तृत विवरण दिया है । इसने ‘ तख्ते ताउज ‘ का उल्लेख किया है ।

जान एल्बर्ट डि मान्डेस्टो ( 1638 ई . ) : इस जर्मन यात्री ने सूरत की यात्रा की और इस प्रदेश की व्यापारिक गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया है ।

निकोलाओ मनूजी ( 1653 – 1708 ई . ) : इतालवी यात्री ने मुगल राजकुमार दारा शिकोह कीसेना में तोपची की नौकरी की और उसकी औरंगजेब के हाथों पराजय होने के बाद चिकित्सक का पेशा अपनाया । इसका संस्करण ग्रंथ ‘ स्टोरियो दो मागोर ‘ में समकालीन भारत का अत्यंत वासतविक और सजीव चित्रण है ।

फ्रांसिस बर्नियर ( 1656–1717 ई . ) : पेशे से चिकित्सक यह फ्रांसीसी यात्री दारा शिकोह और औरंगजेब के बीच हुये उत्तराधिकार के युद्ध का साक्षी था । इसका वर्णन इसने अपनी पुस्तक ‘ हिस्ट्र ऑफ द लेट रेवेलियन इन द स्टेस्स ऑफ द ग्रेट मुगल‘ में किया है । इसकी एक अन्य पुस्तक ‘ ट्रेवल्स इन द मुगल एंपायर ‘ में मुगल साम्राज्य के इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण वर्णन किया है ।

जीन डि थेवेनार ( 1666 ई . ) : फ्रांसीसी यात्री ने सूरत की यात्रा की तथा एलोरा का उल्लेख किया ।

Important Foreign Travellers to India

Foreign TravellersPeriod of Stay Description
Abdur Razzak1443 A.D. – 1444 A.D.He was a Persian scholar.He was also an ambassador of Persia.He visited India during the rule of Deva Raya II of Vijayanagar.
Alberuni/Abu al-Rayhan Muhammad ibn Ahmad al-Biruni1024 A.D. – 1030 A.D.)He was a Persian scholar.He accompanied Mahmud of Ghazni and wrote a book titled ‘Tahqiq-i-hind’.He is considered the father of Indology.
Al-Masudi957 A.D.Al-Masudi was An Arab traveller.In his book Muruj-ul-Zehab he has explained his journey.
Captain William Hawkins1608 A.D. – 1611 A.D.Captain William Hawkins led the first expedition of the English East India Company to India in 1609.He visited India during the reign of Jahangir.He carried a personal letter from King James I of England.He did not succeed in getting Jahangir’s permission to start a factory.
Fa-Hien405 A.D. – 411 A.D.He was a Chinese Buddhist monk.He visited India during the reign of Vikramaditya (Chandragupta II).He is known for his visit to Lumbini.His voyage is described in his travelogue “Record of Buddhist Kingdoms”.
Francois Bernier1656 A.D. – 1668A.D.He was a French physician and traveller.He was in India from 1656-1668He visited India during the reign of Shah Jahan.He was physician to Prince Dara Shikoh and later was attached to the court of Aurangzeb‘Travels in the Mughal Empire’ was written by Francois Bernier.The book mainly talks about the rules of Dara Shikoh and Aurangzeb.
Huien Tsang630 A.D. – 645 A.D.He was a Chinese traveller.He visited India during the supremacy of Harsha Vardhana.Si-yu-ki or ‘The Records of the Western World’ was written by him.
Ibn Battuta1333 A.D. – 1347 A.D.He was a Moroccan traveller.He visited India during the rule of Mohammed Bin Tughlaq.Rihla is a book written by Ibn Batuta.
Marco Polo1292 A.D. – 1294 A.D.He was a European traveller.He visited Southern India during the reign of Rudramma Devi of the Kakatiyas.
Megasthenes302 B.C. – 298 B.C.He was the ambassador of Seleucus.He visited India during the supremacy of Chandragupta Maurya.Chandragupta was known to the Greeks as Sandrocottus.He was also the author of the book ‘Indica’.
Nicolo Conti1420 A.D. – 1421 A.D.He was an Italian merchant.He visited India during the reign of Deva Raya I of Vijayanagar.
Thomas Roe1615 A.D. – 1619 A.D.Sir Thomas Roe was an English diplomat.He visited India during the reign of Jahangir in 1615.He came to seek protection for an English factory at Surat.His “Journal of the Mission to the Mughal Empire” is a treasured contribution to the history of India.

Foreign travellers at a glance

Name (Nationality)Time PeriodVisited during the reign of (Dynasty/Ruler)Literature
Deimachos (Greek)320-273 BCMauryan (Bindusara)
Megasthenes (Greek)302-298 BCMauryan (Chandragupta Maurya)Indica
Fa-Hien (Chinese)405-411 ADGupta (Chandragupta II)Fo-Kwo-Ki (A Record of Buddhistic Kingdoms; also known as Faxian’s Account).
Hiuen Tsang (Chinese)630-645 ADPushyabhuti (Harshavardhana)Great Tang Records on the Western Regions.
I-Tsing (Chinese)671-695 AD
Al-Masudi (Arab)956 ADMuruj adh-dhahab
Al-Biruni (Khwarazm)1024-1030 ADKitab al-Tafhim in both Persian and ArabicKitab-ul-Hind,
Marco Polo (Venetian)1292-1294 ADPandyan (Madverman, Kulasekhara)The Travels of Marco Polo
Ibn Battuta (Moroccan)1333-1347 ADTughlaq (Muhammad-Bin- Tughlaq)A Gift to Those Who Contemplate the Wonders of Cities and the Marvels of Travelling, but commonly known as The Rihla.
Shihabuddin al-Umari (Damascus)1348 ADAt-Ta’rif bi-al-mustalah ash-sharif
Nicolo De Conti (Venetian)1420-1421 ADVijayanagara (Devaraya I)“De varietate fortunae” (“On the Vicissitudes of Fortune”)
Abdur Razzaq (Persian)1443-1444 ADVijayanagara (Devaraya II)Matla-us-Sadain wa Majma-ul-Bahrain
Athanasius Nikitin (Russian)1470-1474 ADBahmani (Muhammad III)The Journey Beyond Three Seas
Domingo Paes (Portuguese)1520-1522 ADVijayanagara (Krishnadeva Raya)Chronica dos reis de Bisnaga (“Chronicle of the Vijayanagar kings”)
Fernao Nuniz (Portuguese)1535-1537 ADTuluva dynasty (Achyutdeva Raya)
William Hawkins (British)1608-1611 ADMughal Emperor (Jahangir)
Sir Thomas Roe (British)1615-1619 ADMughal Emperor (Jahangir)Embassy of Sir Thomas Roe to the Court of the Great Mogul
Peter Mundy(Italian)1630-1634 ADMughal Emperor (Shah Jahan)The Levelling Sea is a concise biography of Peter Mundy.
Jean Baptiste Tavernier (French)1638- 1643 ADMughal Emperor (Shah Jahan)Travels in India
Nicolao Manucci (Italian)1653- 1708 ADTimurid dynasty (Dara Shikoh)History of the Mogul dynasty in India, 1399 – 1657
Francois Bernier (French)1656-1717 ADTimurid Dynasty (Dara Shikoh)Travels in the Mogul Empire, A.D. 1656–1668The History of the Late Revolution of the Empire of the Great Mogol.

Conclusion

What you say about this

X
%d bloggers like this: