राष्ट्रीय मेडिकल आयोग (National medical commission: NMC)

हाल ही में राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) का गठन किया गया है जो भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (Medical council of India: MCI) का स्थान ग्रहण करेगा।

  • NMC की स्थापना राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग अधिनियम (NMC अधिनियम) 2019 के अंतर्गत की गई है जिसके द्वारा भारतीय आयुर्विज्ञान अधिनियम 1956 को निरस्त कर दिया गया है
  • MCI से संबंधित मुद्दे:
  • स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को निम्न स्तरीय विनियमन, जवाबदेही का भाव, कथित भ्रष्टाचार आदि।
  • यह अधिनियम एक ऐसी चिकित्सीय शिक्षा प्रणाली उपलब्ध कराने का प्रयास करता है जो निम्नलिखित सुनिश्चित करेगी:
  • उपयुक्त तथा उच्च गुणवत्ता वाले चिकित्सीय पेशेवरों की उपलब्धता,
  • चिकित्सीय पेशेवरों द्वारा नवीनतम आयुर्विज्ञान अनुसंधान को अपनाना,
  • आयुर्विज्ञान संस्थानों का आवधिक मुलाकात करना तथा
  • शिकायतों के निपटान हेतु प्रभावी तंत्र निर्मित करना।
  • सदस्य: NMC में 33 सदस्य होंगे,
  • एक अध्यक्ष (चिकित्सक होना अनिवार्य है),
  • 10 पदेन सदस्य (जिसमें स्नातक और स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्डों के अध्यक्ष, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के महानिदेशक शामिल होंगे) तथा 22 अंशकालिक सदस्य (जिसमें से कम से कम 60% सदस्य चिकित्सक होने चाहिए)

आयुर्विज्ञान सलाहकार परिषद

इस अधिनियम के अंतर्गत केंद्र सरकार आयुर्विज्ञान सलाहकार परिषद का गठन करेगी। यह एक प्राथमिकी मंच होगा जिसके माध्यम से राज्य/संघ राज्य क्षेत्र NMC के समक्ष अपनी राय तथा चिंताएं प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त परिषद NMC को आयुर्विज्ञान शिक्षा से संबंधित न्यूनतम मांगों को निर्धारित करने और उसे बनाए रखने के उपायों पर परामर्श प्रदान करेगी।

NMC के कार्य:

आयुर्विज्ञान संस्थानों तथा चिकित्सा पेशेवरों के विनियमन के लिए नीतियां तैयार करना।

स्वास्थ्य सेवा से संबंधित मानव संसाधन तथा अवसंरचना की आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना।

इस अधिनियम के अंतर्गत निर्मित विनियमनों का राज्य आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा पालन सुनिश्चित करना।

इस अधिनियम के अंतर्गत विनियमित होने वाले निधि चिकित्सीय संस्थानों तथा डिम्ड विश्वविद्यालयों में 50% तक सीटों पर शुल्क निर्धारित करने के लिए दिशानिर्देश तैयार करना।

स्वशासी या स्वायत्त बोर्ड (Autonomous boards):

यह अधिनियम NMC के पर्यवेक्षण आधीन स्वायत्त बोर्ड स्थापित करता है प्रत्येक स्वायत्त बोर्ड में एक अध्यक्ष और 4 सदस्य होंगे जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किया जाएगा यह बोर्ड हैं:

क्रमश: स्नातक तथा स्नातकोत्तर स्तर पर मानक तय करने तथा चिकित्सा आयुर्वेद ज्ञान शिक्षा का विनियमन करने हेतु स्नातक आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड (Under graduate medical education board) तथा स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान शिक्षा बोर्ड (post graduate medical education board)।

चिकित्सीय संस्थानों की निगरानी तथा रेटिंग के लिए चिकित्सा आकलन तथा रेटिंग बोर्ड (Medical assessment and rating board)।

पेशेवर आचरण व चिकित्सीय नैतिकता का विनियमन व संवर्धन तथा साथ ही (a) लाइसेंस धारक आयुर्विज्ञान चिकित्सकों व (b) सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं (community health providers: CHPs)के राष्ट्रीय पंजीयन को बनाए रखने हेतु नैतिकता तथा चिकित्सीय पंजीकरण बोर्ड (Ethics and medical registration board)।

प्रवेश परीक्षा: इस अधिनियम के तहत विनियमित सभी चिकित्सा संस्थानों में स्नातक तथा परास्नातक अति विशिष्ट चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश के लिए एक समान राष्ट्रीय पात्रता–शह–प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। NMC ऐसी सभी चिकित्सा या आयुर्विज्ञान संस्थान में प्रवेश के लिए सामान्य काउंसलिंग आयोजित करने की नीति को निर्दिष्ट करेगा।

नेशनल एग्जिट टेस्ट (NEXT): प्रैक्टिस हेतु लाइसेंस प्राप्त करने के लिए चिकित्सा संस्थानों से स्नातक डिग्री प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को नेशनल एग्जिट टेस्ट नामक अंतिम वर्षीय स्नातक परीक्षा देनी होगी यह परीक्षा अधिनियम के अंतर्गत आने वाले चिकित्सा संस्थानों में परास्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश का आधार भी होगी।

सीमित अनुज्ञप्ति (Limited licensing): इस अधिनियम के तहत NMC चिकित्सकों को आधुनिक वैधानिक चिकित्सा व्यवसाय में संबंध माध्यम स्तर पर चिकित्सा व्यवसाय करने के लिए सीमित अनुज्ञप्ति प्राप्त कर सकता है यह मध्यम स्तर के चिकित्सक प्राथमिक और निवारक स्वास्थ्य देखभाल में विनिर्दिष्ट औषधि विहित कर सकते हैं।

एनएमसी (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) विधेयक क्या है? इतने सारे डॉक्टर, मेडिकल  छात्र और साथ ही IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) इसके खिलाफ क्यों हैं? - Quora

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