क्या है मेकेदातु बांध परियोजना विवाद?

मेकेदातु बांध को लेकर कर्नाटक एवं तमिलनाडु एक बार फिर से आमने-सामने हो गये हैं और मामला फिर से न्यायालय तक पहुंच चुका है।

क्या है नया?

  • दरअसल 6 जुलाई, 2021 को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी-एस- येदियुरप्पा ने घोषणा कि उनकी सरकार कावेरी बेसिन में लंबे समय से लंबित मेकेदातु बांध परियोजना को आगे बढ़ाएगी ताकि बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन सिटी और आसपास के क्षेत्रें की पेयजल जरूरतों को पूरा किया जा सके।
  • तो दूसरी ओर उसी दिन, नई दिल्ली में, तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरई मुरुगन ने केंद्रीय जल शत्तिफ़ मंत्री से मुलाकात की, और उन्हें इस परियोजना को मंजूरी नहीं देने का आग्रह किया।  इसका मतलब यह हुआ कि जहां कर्नाटक की उपर्युक्त परियोजना का तमिलनाडु विरोध कर रहा है।

कावेरी जल बंटवारा

  • कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण ने फरवरी 2007 को अपने अंतिम आदेश में कावेरी जल को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी  के अलावा सभी तटीय राज्यों -कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु को आवंटन किया।
  • फरवरी 2018 में, सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में, जल आवंटन में संशोधन किया और तमिलनाडु की कीमत पर कर्नाटक के हिस्से में 14.75 हजार मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी फीट) पानी की वृद्धि की। बेंगलुरू और आसपास के क्षेत्रों में पीने के पानी और घरेलू आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बढ़ी हुई मात्र में 4.75 टीएमसी फीट शामिल है।

क्या है मेकेदातु बांध परियोजना?

  • मूल रूप से एक जलविद्युत परियोजना के रूप में प्रस्तावित, मेकेदातु बांध एक बहुउद्देश्यीय परियोजना है। अनुमानित 9,000 करोड़ रुपये की लागत से, इस परियोजना में 67.16-टीएमसी फीट क्षमता के एक जलाशय के निर्माण की परिकल्पना की गई है, जो कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा से लगभग 4 किमी दूर होगा। लगभग 400 मेगावाट का एक जलविद्युत संयंत्र भी प्रस्तावित किया गया है।
  • कर्नाटक सरकार के मुताबिक प्रस्तावित जलाशय मासिक आधार पर तमिलनाडु में प्रवाह को विनियमित करेगा, जैसा कि ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया है। यही कारण है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने तर्क दिया है कि परियोजना तमिलनाडु के किसानों के हितों को प्रभावित नहीं करेगी।

तमिलनाडु द्वारा विरोध का कारण

  • तमिलनाडु का मानना है कि कर्नाटक, परियोजना के माध्यम से, ‘अनियंत्रित जलग्रहण’ (अनकंट्रोल्ड कैचमेंट) से प्रवाह को रोकेगा और मोड़ देगा।
  • एक अनुमान के अनुसार, कर्नाटक में काबिनी बांध और अंतर-राज्यीय सीमा पर बिलीगुंडुलु गेजिंग साइट और कर्नाटक में कृष्णराजा सागर बांध के बीच के क्षेत्र सहित जलग्रहण क्षेत्रें के लिए सालाना लगभग 80 टीएमसी फीट पानी तमिलनाडु में प्रवाहित होता है।
  • तमिलनाडु का यह भी मानना है कि  बेंगलुरु की पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचा मौजूद है, इसलिए मेकेदातु परियोजना की कोई आवश्यकता नहीं है।
  • यह भी मेकेदातु परियोजना का ट्रिब्यूनल के अंतिम आदेश या सुप्रीम कोर्ट के फैसले में उल्लेख नहीं है।

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