कोल बेड मिथेन (सीबीएम) के उत्पादन में कोल इंडिया

कोल इंडिया (सीआईएल) झारखंड में भारत कोकिंग कोल (बीसीसीएल) के तहत अपने लीज होल्ड क्षेत्र से कोल बेड मीथेन (Coal bed methane: CBM) का उत्पादन शुरू करेगी।

  • यह पहली बार है जब कोल इंडिया लिमिटेड कोयले से स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन करने की अपनी विविधीकरण योजना के हिस्से के रूप में, कोयले की परतों से गैस का उत्पादन कर रहा है। सीबीएम निष्कर्षण कोयले का खनन करते समय गैस को वायुमंडल में छोड़ने से रोकेगा।
  • उत्पादित सीबीएम का उपयोग शहरी गैस वितरण के लिए किया जा सकता है या गेल गैस पाइपलाइन के माध्यम से वितरित किया जा सकता है, जिसे ऊर्जा गंगा परियोजना के तहत चालू किया जा रहा है।

भारत में तीसरी कंपनी

  • ग्रेट ईस्टर्न एनर्जी कॉरपोरेशन (जीईईसीएल) और एस्सार ऑयल एंड गैस एक्सप्लोरेशन एंड प्रोडक्शन (ईओजीईपीएल) के बाद कोल इंडिया लिमिटेड पूर्वी भारत के कोयला क्षेत्रों से सीबीएम निकालने वाली तीसरी कंपनी होगी।
  • उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 तक, कोल इंडिया लिमिटेड को केवल अपने लीज होल्ड क्षेत्र से कोयला निकालने की अनुमति थी। लेकिन पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कोल बेड मीथेन के दोहन के लिए केवल एक केंद्रीय या राज्य पीएसयू को शामिल करने के लिए एक शर्त के साथ, कोल इंडिया को सीबीएम निकालने की अनुमति दी है और अधिकांश हिस्सेदारी सीआईएल के पास है।

क्या है कोल बेड मीथेन (CBM)?

  • कोल बेड मीथेन (सीबीएम) एक हाइड्रोकार्बन गैस है जो मुख्य रूप से सीएच4 से बनी होती है और दोहित अवस्था में कोल बेड में उत्पन्न और संग्रहीत होती है।
  • गैस का निर्माण पादप सामग्री के कोयले में प्राकृतिक रूपांतरण के दौरान होता है, जिसे कोयलाकरण (कोलफिकेशन) के रूप में जाना जाता है।
  • जब कोलिफिकेशन (coalification) होता है तो कोयला पानी से संतृप्त हो जाता है और उसमें मीथेन गैस फंस जाती है। ड्रिलिंग और निष्कर्षण के माध्यम से कोयला निक्षेप और सीम से सीबीएम प्राप्त की जा सकती है।
  • कोयला खनन में, इसे आमतौर पर ‘मार्श गैस’ कहा जाता है।
  • सीबीएम एक प्रकार की अपरंपरागत गैस है जो कोल बेड में होती है। यहां, कोयला स्रोत चट्टान और जलाशय दोनों है।

कोल बेड मीथेन के संघटक 

  • सीबीएम में मीथेन यानी सीएच4 (95 प्रतिशत से अधिक), अल्प मात्र में भारी हाइड्रोकार्बन और गैर-हाइड्रोकार्बन गैसों (यानी, नाइट्रोन और कार्बन डाई ऑक्साइ) से बना है।
  • न केवल हाइड्रोकार्बन उत्पादन निरंतर है, सीबीएम का प्रवास, संचय, वितरण और शोषण भी निरंतर है। इसलिए, सीबीएम एक विशिष्ट निरंतर गैस जमा है।

क्या हैं कोल बेड मीथेन के उपयोग?

  • इसका उपयोग बिजली उत्पादन के लिए गैस टर्बाइनों में प्राकृतिक गैस के स्थान पर किया जा सकता है।
  • सीबीएम का उपयोग उर्वरकों और प्लास्टिक के निर्माण के लिए फीडस्टॉक के रूप में भी किया जा सकता है।
  • कोल बेड मीथेन को अन्य प्रकार के हाइड्रोकार्बन जैसे डीजल और गैसोलीन में परिवर्तित किया जा सकता है जिसका उपयोग आमतौर पर ऑटोमोबाइल के लिए ईंधन के रूप में किया जाता है।

क्या कोल बेड मिथेन हानिकारक भी है?

  • कोल बेड मीथेन निष्कर्षण से संबंधित विवाद पानी के उपयोग और वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर इसके प्रभाव से संबंधित है।
  • दरअसल कोल बेड मीथेन उत्खनन में हाइड्रोस्टेटिक दबाव को कम करने और गैस को मुक्त करने के लिए कोल सीम से बड़ी मात्र में पानी पंप किया जात है।
  • कोल बेड मीथेन कुओं से उत्पादित पानी में काफी अधिक लवणता (सोडियम बाइ कार्बोनेट आयनों या क्लोराइड के घुलने के कारण) होती है, जो मिट्टी की संरचना पर प्रतिकूल और दीर्घकालिक रासायनिक या भौतिक प्रभावों के कारण कुछ कृषि गतिविधियों के लिए अनुपयुक्त हो जाती है।
  • इसके अलावा, सीबीएम एक जीवाश्म ईंधन है जो दहन के दौरान एक ज्ञात ग्रीनहाउस गैस कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जित करता है। इसके अलावा, इसका मुख्य घटक, मीथेन, कार्बन डाई ऑक्साइड की तुलना में 72 गुना अधिक ग्लोबल वार्मिंग क्षमता प्रति यूनिट द्रव्यमान प्रदान करता है।

भारत में कोल बेड मीथेन संसाधन

  • झारखंड सीबीएम ब्लॉक-1 का संसाधन आधार 26 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) है जो 27 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। 2026 से वाणिज्यिक संचालन शुरू होने के बाद औसत उत्पादन क्षमता प्रति दिन 1.3 मिलियन मीट्रिक मानक क्यूबिक मीटर आंकी गई है।
  • पश्चिम बंगाल में ईस्टर्न कोलफील्ड्स के अंतर्गत रानीगंज के एक ब्लॉक में 2.2 बीसीएम संसाधन हैं जबकि छत्तीसगढ़ में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स के तहत सोहागपुर सीबीएम ब्लॉक में मीथेन का 500 मिलियन क्यूबिक मीटर संसाधन है।

(Sources: Financial Express, Science Direct and Generon)

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