क्या है ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स?

क्या है ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स?

  • विश्व की समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-7 ने जून 2021 के प्रथम सप्ताह में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया।  सात देशों के इस समूह के वित्त मंत्रियों की बैठक में  सैद्धांतिक रूप से वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर दर यानी ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टैक्स (global minimum corporate tax rate) की पुष्टि करने के लिए सहमत हुए।

क्या निर्णय लिए गए हैं?

  • सदस्य देशों ने 15 प्रतिशत की वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर दर निर्धारित करने पर सहमत हुये हैं। इस समझौते पर अब जुलाई में जी20 के वित्तीय मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नरों की बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी।

क्या है वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर?

  • वैश्विक न्यूनतम कर की दर विदेशी मुनाफे पर लागू होगी। बहुराष्ट्रीय फर्में अपने उचित करों का भुगतान करने के बावजूद प्रभावी रूप से एकाधिकार वाले हैं। वे खामियों का फायदा उठाने और अपनी कर देनदारी कम करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं।
  • अधिकांश व्यवसाय केवल उन स्थानों पर कार्यालय स्थापित करते हैं जहां कर की दरें कम या अस्तित्वहीन हैं।  वैश्विक न्यूनतम कॉर्पोरेट कर दर एक न्यूनतम कर दर है जिसका भुगतान कंपनियों को करना होगा चाहे वे कहीं भी पंजीकृत हों।
  • एडवांस्ड देशों का प्राथमिक लक्ष्य बहुराष्ट्रीय कंपनियों को अपने मूल देशों को छोड़कर मुनाफे और कर राजस्व को न्यून कर वाले देशों में स्थानांतरित करने से हतोत्साहित करना है, भले ही ऐसी कंपनियां अपनी बिक्री कहीं करें।
  • वस्तुतः दवा पेटेंट, सॉफ्टवेयर और बौद्धिक संपदा पर रॉयल्टी से आय न्यून कर वाले देशों में चली गई है, जिससे कंपनियों को अपने पारंपरिक घरेलू देशों में उच्च करों का भुगतान करने से बचने की अनुमति मिल जाती है। आमेजन, एप्पल, अल्फाबेट एवं फेसबुक जैसी कंपनियों को विशेष रूप से लक्षित किया गया है। 
  • न्यूनतम 15 प्रतिशत कर दर के अपने प्रस्ताव के साथ, अमेरिका का बाइडेन प्रशासन अमेरिकी फर्मों को वित्तीय नुकसान में डाले बिना, नवाचार, बुनियादी ढांचे और अन्य विशेषताओं पर प्रतिस्पर्धा की अनुमति दिए बिना इस तरह के कर आधार क्षरण को कम करने की उम्मीद करता है।
  • पूर्ववर्ती अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन ने 2017 में यू.एस. कॉर्पोरेट  ऑफशोर न्यूनतम कर के साथ पहला कदम उठाया था। अमेरिकी वित्त मंत्री जानेट येलेन ने 21 प्रतिशत की ग्लोबल मिनिमम टैक्स की वकालत की थी। परंतु जी-7 देश 15 प्रतिशत पर सहमत हुये हैं।
  • सरकारें अभी भी जो भी स्थानीय कॉर्पोरेट  कर की दर चाहती हैं, निर्धारित कर सकती हैं, लेकिन अगर कंपनियां किसी विशेष देश में कम दरों का भुगतान करती हैं, तो उनकी घरेलू सरकारें अपने करों को न्यूनतम दर पर ‘टॉप-अप’ कर सकती हैं, जिससे मुनाफे को स्थानांतरित करने का लाभ समाप्त हो जाएगा।

बेस इरोसन एंड प्रॉफिट सिफ्टिंग (बीईपीएस) पर कार्रवाई

  • सभी देश घरेलू कर ‘बेस इरोसन एंड प्रॉफिट सिफ्टिंग’ यानी  बीईपीएस (BEPS: Base erosion and profit shifting) से प्रभावित हैं, जो बहुराष्ट्रीय निगमों द्वारा विभिन्न देशों की कर प्रणालियों में खामियों का फायदा उठाने के कारण होता है। चूंकि विकासशील देश भी कॉर्पाेरेट आयकर पर अधिक निर्भर हैं, वे भी बीईपीएस से असमान रूप से प्रभावित हैं।
  • बीईपीएस उच्च-कर क्षेत्रधिकार से कम-कर वाले देशों में मुनाफे को ‘स्थानांतरित’ करने के लिए बहुराष्ट्रीय निगमों की कर नियोजन रणनीति को संदर्भित करता है। परिणामस्वरूप, उच्च-कर क्षेत्रधिकारों का ‘कर आधार’ कम हो जाता है। बीईपीएस टूल्स कॉर्पोरेट टैक्स हेवन में लाभ को ‘स्थानांतरित’ करने के लिए उपलब्ध हैं, साथ ही हेवन के भीतर करों का भुगतान करने से बचने के लिए अतिरिक्त बीईपीएस तकनीकें भी उपलब्ध हैं।
  • टैक्स जस्टिस नेटवर्क की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स चोरी के कारण यूएस ट्रेजरी को सालाना लगभग 50 बिलियन डॉलर का नुकसान होता है, जर्मनी और फ्रांस भी अग्रणी देशों में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्पोरेट कर दुरुपयोग के कारण भारत का वार्षिक कर नुकसान 10 बिलियन डॉलर से अधिक होने का अनुमान है।
  • वैसे बीईपीएस पर ओईसीडी/जी20 ने पूर्व में एक समझौता भी किया है जिसमें 135 से अधिक देश कंपनियों द्वारा कर से बचने की रणनीतियों को समाप्त करने के लिए सहयोग कर रहे हैं। परंतु अब ग्लोबल मिनिमम कॉर्पोरेट टक्स के माध्यम से बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर नकेल कसने की तैयारी की जा रही है।

क्यों होगा भारत को लाभ?

  • भारत को वैश्विक न्यूनतम 15 प्रतिशत कॉर्पोरेट कर दर समझौते से लाभ होने की संभावना है क्योंकि प्रभावी घरेलू कर दर उपर्युक्त सीमा से ऊपर है। इस तरह भारत निवेश आकर्षित करना जारी रखेगा।
  • उल्लेखनीय है कि भारत ने सितंबर 2019 में घरेलू कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट करों को 22 प्रतिशत और नई घरेलू विनिर्माण इकाइयों के लिए घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। कुछ शर्तों के अधीन रियायती कर की दर मौजूदा घरेलू कंपनियों के लिए भी बढ़ा दी गई थी। 
  • भारत को फायदा होने की उम्मीद है क्योंकि यह बड़ी संख्या में वैश्विक टेक कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार है। ऐसा इसलिए 15 प्रतिशत के वैश्विक न्यूनतम कर का मतलब है कि  रियायती भारतीय कॉर्पोरेट कर व्यवस्था अभी भी काम करेगी, और भारत निवेश को आकर्षित करना जारी रखेगा।
  • भारत में प्रभावी कर दर अभी भी ग्लोबल मिनिमम कर दायरे से ऊपर है। ऐसे में टेक व्यवसाय के भारत से पलायन करने की संभावना कम है।
  • दूसरी बात, भारत अपने बड़े आंतरिक बाजार, प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्तापूर्ण श्रम, निर्यात के लिए रणनीतिक स्थान और एक संपन्न निजी क्षेत्र के कारण विदेशी निवेश आकर्षित करता है। इसलिए कर दर निवेश आकर्षित करने के कई कारकों में से एक छोटा से कारक है। भारत टैक्स हैवन भी नहीं है।

सबके लिए नहीं है फायदेमंद

  • हालांकि 15 प्रतिशत की वैश्विक न्यूनतम कर दर अमेरिकी सरकार और पश्चिमी यूरोप के अधिकांश अन्य देशों के लिए लाभकारी है तो दूसरी ओर स्विटजरलैंड, नीदरलैंड, आयरलैंड और लक्जमबर्ग जैसे कम कर वाले यूरोपीय क्षेत्रधिकार और कुछ कैरिबियन देश नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं जो टैक्स हेवंस कहलाते हैं। इन देशों को विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षित बने रहने के लिए कुछ नया करना होगा। हालांकि निकट भविष्य में इस समझौता को मानने के अलावा कोई चारा नहीं दिखता।
  • -इसके अलावा इस समझौते के तहत अन्य प्रमुऽ राष्ट्रों को एक साथ लाने में भी चुनौती का सामना करना पड़ेगा, क्योंकि यह विभिन्न देशों की कर नीति तय करने के लिए संप्रभु अधिकार को प्रभावित करता है।
The Push for a Higher, Worldwide Minimum Tax Rate, Explained
What is Minimum Alternate Tax?

Due to an increase in the number of zero tax paying companies, Minimum Alternate Tax (MAT) was introduced by the Finance Act, 1987 with effect from assessment year 1988-89.Later on, it was withdrawn by the Finance Act, 1990 and then reintroduced by Finance Act, 1996. MAT was later extended to cover non-corporate entities as well. MAT is an important tool with which tax avoidance can be prevented. At times it may happen that a taxpayer, being a company, may have generated income during the year, but by taking the advantage of various provisions of Income-tax Law like exemptions, deductions, depreciation, etc., it may have reduced its tax liability or may not have paid any tax at all. MAT is calculated at 15% on the book profit that the profit shown in the profit and loss account or at the usual corporate rates, and whichever is higher is payable as tax. All companies in India, whether domestic or foreign, fall under this provision.


 How would a global minimum corporate tax work?
The global minimum tax rate would apply to overseas profits. Governments could still set whatever local corporate tax rate they want, but if companies pay lower rates in a particular country, their home governments could “top-up” their taxes to the minimum rate, eliminating the advantage of shifting profits

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