डेली करंट अफेयर्स (2 जून 2021)

भारत सरकार का पब्लिक डेब्ट 89.6 प्रतिशत के स्तर पर

  • अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2003 में जीडीपी के 84.2 प्रतिशत के उच्च स्तर से (उदारीकरण के बाद से), 2010 तक जनरल पब्लिक डेब्ट रेशियो यानी सामान्य सरकारी ऋण अनुपात (Public Debt Ratio) घटकर 66 प्रतिशत हो गया, जो 2019 में फिर से बढ़कर 73.9 प्रतिशत हो गया। कोविड-प्रेरित जीडीपी संकुचन और बड़े पैमाने पर उधार लेने की वजह से सरकार का पब्लिक डेब्ट अनुपात बढ़कर 89.6 प्रतिशत के स्तर को स्पर्श कर लिया।
  • उल्लेखनीय है कि एनके सिंह के नेतृत्व वाले एफआरबीएम पैनल ने 2017 में सुझाव दिया था कि वित्त वर्ष 23 तक जनरल पब्लिक डेब्ट को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 60 प्रतिशत पर रखा जाए।

क्या होता है पब्लिक डेब्ट यानी सार्वजनिक ऋण?

  • केंद्र सरकार मोटे तौर पर अपनी देनदारियों को दो व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत करती है। भारत की संचित निधि के विरुद्ध अनुबंधित ऋण को सार्वजनिक ऋण के रूप में परिभाषित किया गया है और इसमें संविधान के अनुच्छेद 266 (2) के तहत भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) के बाहर प्राप्त अन्य सभी निधियां शामिल हैं, जहां सरकार केवल एक बैंकर या संरक्षक के रूप में कार्य करती है। दूसरे प्रकार की देनदारियों को सार्वजनिक ऋण (public debt) कहा जाता है।
  • आंतरिक ऋण समग्र सार्वजनिक ऋण (पब्लिक डेब्ट) का 93 प्रतिशत से अधिक है।
  • आंतरिक ऋण जो सार्वजनिक ऋण के बड़े हिस्से का निर्माण करते हैं, उन्हें आगे दो व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जाता है: विपणन योग्य  और गैर-विपणन योग्य ऋण (non-marketable debt)।
  • दिनांकित सरकारी प्रतिभूतियां (G-sec) और ट्रेजरी बिल (टी-बिल) नीलामी के माध्यम से जारी किए जाते हैं और ये विपणन योग्य पब्लिक डेब्ट की श्रेणी में आते हैं।
  • राज्य सरकारों और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को जारी किए गए मध्यवर्ती ट्रेजरी बिल (14 दिनों की परिपक्वता अवधि के साथ), राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) को जारी विशेष प्रतिभूतियों को गैर-विपणन योग्य ऋण के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

गैर-खाद्य बैंक क्रेडिट में बढ़ोतरी

  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गैर-खाद्य बैंक ऋण (Non-food bank credit) अप्रैल 2021 में 5.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसी महीने में यह 6.7 प्रतिशत था।
  • भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी ‘बैंक क्रेडिट के सेक्टोरल डिप्लॉयमेंट- अप्रैल 2021’ (Sectoral Deployment of Bank Credit – April 2021) के आंकड़ों के अनुसार कृषि और संबद्ध गतिविधियों के लिए अग्रिमों में वृद्धि अप्रैल 2020 में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि की तुलना में अप्रैल 2021 में बढ़कर 11.3 प्रतिशत हो गई।
  • उद्योग के लिए ऋण वृद्धि अप्रैल 2021 में घटकर 0.4 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल 2020 में 1.7 प्रतिशत थी।
  • हालांकि, मध्यम उद्योगों को ऋण में अप्रैल 2021 में 43.8 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एक साल पहले यह 6.4 प्रतिशत थी।

क्या अंतर हैं खाद्य क्रेडिट एवं गैर-खाद्य क्रेडिट के बीच?

  • खाद्य क्रेडिटः (food credit) भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार की एजेंसियों को किसानों से खाद्यान्न की खरीद के लिए बैंकों द्वारा प्रदान किया गया ऋण सकल बैंक ऋण  का एक हिस्सा है।
  • केंद्र सरकार द्वारा खाद्य सब्सिडी जारी करने के बाद ऋण चुकाया जाता है। इसलिए इसे बैंकों द्वारा शून्य जोखिम उधार माना जाता है।
  • एफसीआई जनता के माध्यम से पूरे देश में खाद्यान्न के समर्थन संचालन, खरीद, भंडारण, संरक्षण, अंतर-राज्य मूवमेंट और वितरण के लिए देश की खाद्य नीति लागू करता है।
  • गैर-खाद्य बैंक क्रेडिटः गैर-खाद्य ऋण (Non-food bank credit) में कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, उद्योग (सूक्ष्म और लघु, मध्यम और बड़े), सेवाएँ और पर्सनल लोन शामिल हैं।

भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर -7.3 प्रतिशत

  • देश का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर वित्त वर्ष  2020- 2021 की मार्च तिमाही में -7.3% दर्ज की गयी।  हालाँकि मार्च तिमाही में 1.6 फीसदी  की दर से बढ़ी है। ये आंकड़े राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी किये गए। 
  • वित्त वर्ष 2019-20 में घरेलू उत्पाद (GDP) विकास दर 4% रहा था।
  • वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में GDP 38.96 लाख करोड़ रुपए की रही जो वित्त वर्ष  2019-20 की चौथी तिमाही में 38.33 करोड़ रुपए की थी। इस हिसाब से मार्च तिमाही में GDP की ग्रोथ 1.6 फीसदी रही है।
  • कोरोना वायरस महामारी के कारण पिछले 4 दशकों में यह भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे खराब प्रदर्शन है।
  • उल्लेखनीय है कि  कोरोना वायरस महामारी के कारण FY21 के Q1 में GDP में ऐतिहासिक गिरावट आई थी और यह -23.9% रही थी।

राजकोषीय घाटा-2020-21

  • राजकोषीय घाटा (फिस्कल डेफिसिट) वित्त वर्ष 2020-21 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 9.3 प्रतिशत रहा। यह वित्त मंत्रालय के संशोधित बजट अनुमान 9.5 प्रतिशत से कम है।  पिछले वित्त वर्ष में राजस्व घाटा 7.42 प्रतिशत था।
  • निरपेक्ष रूप से राजकोषीय घाटा 18,21,461 करोड़ रुपये है जो प्रतिशत में जीडीपी का 9.3 प्रतिशत है।
  • फरवरी 2020 में पेश बजट में 2020-21 के लिये शुरू में राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था।
  • वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में पिछले वित्त वर्ष के लिये राजकोषीय घाटा अनुमान को संशोधित कर 9.5 प्रतिशत कर दिया गया।
  • वित्त वर्ष 2019-20 में राजकोषीय घाटा बढ़कर जीडीपी का 4.6 प्रतिशत रहा था।  

केरल में मानसून की शुरुआत मापदंड

  • केरल में मानसून की शुरुआत में तीन दिन की देरी से हुई। आईएमडी ने आरम्भ में कहा था कि मानसून की शुरुआत 31 मई को होगी परन्तु बाद में इसे संशोधित कर 3 जून कर दिया ।
  • केरल में मानसून की शुरुआत सामान्य रूप से 1 जून को होती है, जो भारत के लिए चार महीने के वर्षा के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है।
  • वैसे केरल में भारी वर्षा होने के पश्चात आमतौर पर लोग मानने लगते हैं कि मानसून का आगमन हो गया। परंतु आईएमडी की नजर में केरल में केवल भारी वर्षा ही दक्षिण-पश्चिम मानसून आगमन का संकेत नहीं होता।
  • आईएमडी आधिकारिक पुष्टि के लिए कई शर्तों के पूरा होने का इंतजार करता है।  
  • मानसून की शुरुआत इन तीन मापदंडों पर निर्भर करती है:
    • यदि केरल और तटीय कर्नाटक में उपलब्ध 14 मौसम स्टेशनों में से 60 प्रतिशत (8) अर्थात् मिनिकॉय, अमिनी, तिरुवनंतपुरम, पुनालुर, कोल्लम, अलाप्पुझा, कोट्टायम, कोच्चि, त्रिशूर, कोझीकोड, थालास्सेरी, कन्नूर, कुडलू और मैंगलोर ने लगातार दो दिनों तक 2.5 मिलीमीटर या उससे अधिक बारिश की रिपोर्ट दी है तो दूसरे दिन केरल के मानसून की शुरुआत की घोषणा की जाएगी,
    • बारिश वाले पछुआ पवन न्यूनतम गहराई और गति पर होंगी;
    • क्लाउडिंग की एक निश्चित डिग्री, जिसे ‘आउटगोइंग लॉन्गवेव रेडिएशन’ (OLR) नामक एक पैरामीटर द्वारा दर्शाया गया है, जो 200 W/वर्ग मीटर से कम हो।

बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम (HCDP) का शुभारंभ

  • केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने बागवानी (हॉर्टिकल्चर) के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए 31 मई 2021 को  बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम (Horticulture Cluster Development Programme (CDP) का शुभारंभ किया।
  • प्रायोगिक चरण में कार्यक्रम के लिए चुने गए कुल 53 समूहों में से 12 बागवानी समूहों में कार्यक्रम लागू किया जा रहा है ।
  • केंद्रीय क्षेत्र का यह कार्यक्रम राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) द्वारा कार्यान्वित  किया जा रहा है। 
  • सीडीपी का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए पहचान किए गए बागवानी समूहों का विकास करना और विकसित बनाना है।
  • कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएंडएफडब्ल्यू) ने 53 बागवानी समूहों की पहचान की है, जिनमें से 12 को कार्यक्रम के पायलट लॉन्च के लिए चुना गया है। पायलट प्रोजेक्ट से मिली सीख के आधार पर सभी चिन्हित समूहों को कवर करने के लिए कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जाएगा।
  • सीडीपी से लगभग 10 लाख किसानों और मूल्य श्रृंखला के जुड़े हुए हितधारकों को लाभ मिलेगा।
  • इस कार्यक्रम के साथ केंद्र सरकार का लक्ष्य लक्षित फसलों के निर्यात में लगभग 20% तक बढ़ोतरी करना और क्लस्टर फसलों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए क्लस्टर-विशिष्ट ब्रांड बनाना है।
  • प्रायोगिक चरण के क्लस्टरों में सेब के लिए शोपियां (जम्मू-कश्मीर) और किन्नौर (हिमाचल प्रदेश) शामिल हैं। इसके तहत आम के लिए लखनऊ (उत्तर प्रदेश), कच्छ (गुजरात) और महबूबनगर (तेलंगाना), केले के लिए अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) और थेनी (तमिलनाडु), अंगूर के लिए नासिक (महाराष्ट्र), अनानास के लिए सिपाहीजला (त्रिपुरा), अनार के लिए सोलापुर (महाराष्ट्र) और चित्रदुर्ग (कर्नाटक) तथा हल्दी के लिए पश्चिम जयंतिया हिल्स (मेघालय) शामिल हैं।
  • ये क्लस्टर क्लस्टर विकास एजेंसियों (सीडीए) के माध्यम से कार्यान्वित किए जाएंगे जिन्हें संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकार की सिफारिशों पर नियुक्त किया जाता है।
  • लाभ: क्लस्टर विकास कार्यक्रम न केवल आर्थिक रूप से अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने में मदद देगी बल्कि किसानों को उच्च पारिश्रमिक दिलाने के लिए राष्ट्रीय और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ उन्हें जोड़ने के लिए क्लस्टर-विशिष्ट ब्रांड भी तैयार करेगी।

बागवानी क्षेत्र और उत्पादन

  • वर्ष 2019-20 के दौरान देश में 25.66 मिलियन हैक्टेयर भूमि पर बागवानी क्षेत्र का अब तक का सर्वाधिक 320.77 मिलियन टन उत्पादन हुआ।
  • वर्ष 2020-21 के पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार देश में 27.17 लाख हेक्टेयर भूमि पर बागवानी क्षेत्र का कुल उत्पादन 326.58 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है।
  • देशभर में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास और इसे बढ़ावा देने के लिए, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 को क्षेत्र पहले अधिक 2250 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।
  • ये आवंटन केन्द्र सरकार द्वारा समर्थित ‘मिशन फॉर इंटिग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (एमआईडीएच)’ योजना के अंतर्गत किया गया है।

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