डेली करेंट अफेयर्स (1 जून 2021)

चीन में अब तीन बच्चोंकी नीति, परंतु चिंताएं यथावत

  • जनगणना के आंकड़ों में जन्म दर में भारी गिरावट के बाद चीन ने  दंपतियों को तीन बच्चे पैदा करने की अनुमति देने की घोषणा की है। इस तरह चीन अब ‘थ्री चिल्ड्रेन’ पॉलिसी की ओर कदम रखा है।
  • उल्लेखनीय है कि चीन ने साल 2016 में अपनी दशकों पुरानी एक बच्चे की नीति (वन चाइल्ड पॉलिसी) को ऽत्म कर दिया था और बदले में ‘दो बच्चों की नीति’ (टू चाइल्ड पॉलिसी) अपनाया।
  • -हालांकि वर्ष 2016 की छूट ने देश में युवा लोगों के अनुपात में कुछ सुधार किया, परंतु इस नीतिगत परिवर्तन को आसन्न जनसांख्यिकीय संकट को टालने में अपर्याप्त माना गया।

जनसंख्या में गिरावट के कारण

  • शहरों में बच्चों की परवरिश की लागत ने कई चीनी दंपतियों को परेशान किया है।
  • चीन की जनसंख्या प्रवृत्ति पिछले कुछ वर्षों में बड़े पैमाने पर ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ द्वारा आकार दी गई है, जिसे पूर्व चीनी राष्ट्रपति डेन शियाओपिंग द्वारा 1979 में जनसंख्या वृद्धि को धीमा करने के लिए आरंभ किया गया था।
  • नीति, जिसे शहरी क्षेत्रों में अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया गया था, को कई माध्यमों से लागू किया गया था, जिसमें परिवारों को एक बच्चा पैदा करने के लिए वित्तीय रूप से प्रोत्साहित करना, गर्भ निरोधकों को व्यापक रूप से उपलब्ध कराना और नीति का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रतिबंध लगाना शामिल था।
  • चीनी अधिकारियों ने लंबे समय से इस नीति को एक सफलता के रूप में स्वीकार किया है, यह दावा करते हुए कि इसने 40 करोड़ लोगों को पैदा होने से रोककर देश को गंभीर भोजन और पानी की कमी को दूर करने में मदद की है।
  • वन चाइल्ड पॉलिसी नियमों का उल्लंघन करने वाले परिवारों को जुर्माना, रोजगार की हानि और कभी-कभी जबरन गर्भपात का सामना करना पड़ा।
  • एक बच्चे की नीति ने देश में एक गंभीर लैंगिक असंतुलन को भी जन्म दिया। लड़कों की पारंपरिक प्राथमिकता के कारण बड़ी संख्या में लड़कियों को छोड़ दिया गया या अनाथालयों में रखा गया, या लिंग-चयनात्मक गर्भपात या यहां तक ​​कि कन्या भ्रूण हत्या के मामले भी दर्ज किये गये।
  • इसके अतिरिक्त, चीन के शासकों पर सामाजिक नियंत्रण के एक उपकरण के रूप में प्रजनन सीमाओं को लागू करने का आरोप भी लगाया गया है। उइगर मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यक को जनसंख्या वृद्धि को प्रतिबंधित करने के लिए कम बच्चे पैदा करने के लिए मजबूर किया गया है।

क्यों कुछ लोग नीति का विरोध कर रहे हैं?

  • मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार पूर्व की नीतियों की तरह ही मौजूदा नीति भी यौन और प्रजनन अधिकारों का उल्लंघन है।
  • संगठन के मुताबिक लोगों के पास कितने बच्चे होने चाहिये, यह निर्धारण व नियंत्रण का अधिकार सरकारों के पास नहीं है।
  • यह भी कि अपनी जन्म नीति को ‘अनुकूलित’ करने के बजाय, चीन को लोगों के जीवन विकल्पों का सम्मान करना चाहिए और लोगों के परिवार नियोजन निर्णयों पर किसी भी आक्रामक और दंडात्मक नियंत्रण को समाप्त करना चाहिए।
  • वास्तव में, कई लोग यह भी पूछ रहे हैं कि तीन-बच्चे की नीति का मतलब अधिक बच्चे कैसे हो सकता है जब टू-चाइल्ड पॉलिसी से यह संभव नहीं हो सका।

क्या कहते हैं जनगणना के आंकड़े?

  • मई 2021 में जारी की गई चीनी जनगणना डेटा से पता चलता है कि पिछले साल लगभग 12 मिलियन बच्चे पैदा हुए थे, जो वर्ष 2016 में 18 मिलियन से की तुलना काफी कमी है और 1960 के बाद से दर्ज किए गए जन्मों की सबसे कम संख्या है यह।
  • यह जनगणना 2020 के अंत में आयोजित की गई थी।

भारत में पाये गये कोरोनावायरस वैरिएंट को डेल्टा व कप्पा नाम

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोनावायरस के नए उभरते उन वेरिएंट को लेबल करने के लिए नामों के एक समूह की सिफारिश की है जो ‘वैश्विक चिंता’ (ग्लोबल कंसर्न) वाला हो सकता है।
  • -भारत में पहली बार पहचाने जाने वाले वैरिएंट, जिसे तकनीकी रूप से बी-1-617-2 के रूप में जाना जाता है, को अब ‘डेल्टा’ और तथाकथित ‘यूके वैरिएंट’ को ‘अल्फा’ के रूप में वर्णित किया गया है।
  • -भारत में ही पाये गये एक नए वैरिएंट बी-1-617-1 को ‘कप्पा’ नाम दिया गया है।
  • -हालांकि विश्व स्वस्थ्य संगठन के अनुसार मौजूदा वैज्ञानिक नामकरण प्रणाली जारी रहेगी और नए नाम केवल उन लेबलों का उपयोग करके सार्वजनिक चर्चा में सहायता करने के लिए होंगे।
  • अब तक, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वैश्विक चिंता के चार वैरिएंट की पहचान की गई हैः बी-1-1-7, बी-1-351, पी2 और बी-1-617-2। -ग्रीक वर्णमाला के पहले चार अक्षरों के बाद उनके सार्वजनिक लेबल क्रमशः अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा होंगे।

कृतज्ञ कृषि हैकाथॉन

  • केंद्रीय कृषि मंत्रालय के कृषि हैकाथॉन “कृतज्ञ” में प्रतियोगियों ने कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए एक से बढ़कर एक उपयोगी संरचनाएं सृजित कर अपनी योग्यता व क्षमता को साबित किया है।
  • भारत की कृषि शिक्षा और आधुनिक बने व प्रतिभाओं को पूरा अवसर मिले, इसलिए राष्ट्रीय कृषि उच्चतर शिक्षा परियोजना (NAHEP) केतहत “कृतज्ञ” कृषि हैकाथॉन का आयोजन किया गया।
  • महिलाओं के अनुकूल उपकरणों पर विशेष जोर देने के साथ-साथ खेती में मशीनीकरण को बढ़ाने के लिए संभावित प्रौद्योगिकी समाधानों को बढावा देना इस आयोजन का उद्देश्य था।

इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स डिवाइस (IoT device)- ऐम्बिटैग

  • भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रोपड़ (IIT Ropar) ने देश में अपनी तरह की पहली अत्याधुनिक इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स  डिवाइस (IoT device)- ऐम्बिटैग (AmbiTag) का विकास किया है।
  • यह डिवाइस खराब होने वाले उत्पादों, वैक्सीन और यहां तक कि शरीर के अंगों व रक्त की ढुलाई के दौरान उनके आसपास का रियल टाइम तापमान दर्ज करती है।
  • दर्ज किए गए इस तापमान से यह जानने में सहायता मिलती है कि दुनिया में कहीं भी भेजा गया कोई सामान तापमान में अंतर के कारण अभी तक उपयोग के योग्य है या खराब हो गया है।
  • कोविड-19 वैक्सीन, अंगों और रक्त के परिवहन सहित वैक्सीन के लिए यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यूएसबी के आकार की डिवाइस, एम्बिटैग एक बार रिचार्ज होकर पूरे 90 दिन के लिए किसी भी टाइम जोन में -40 से +80 डिग्री तक के वातावरण में निरंतर तापमान दर्ज करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध इस तरह की डिवाइस सिर्फ 30-60 दिनों तक की अवधि के लिए तापमान दर्ज करती हैं।Internet of Things: Everything You Need to Know | Cleo                                                                                                                      

क्या है  इंटरनेट ऑफ थिंग्स?

  • इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) भौतिक वस्तुओं  यानि “चीजें” के नेटवर्क का वर्णन करता है- जो इंटरनेट पर अन्य उपकरणों और प्रणालियों के साथ डेटा को जोड़ने और आदान-प्रदान करने के उद्देश्य से सेंसर, सॉफ्टवेयर और अन्य तकनीकों के साथ एम्बेडेड हैं।
  • IoT के द्वारा हम एम्बेडेड उपकरणों के माध्यम से रोजमर्रा की वस्तुओं-रसोई के उपकरण, कार, थर्मोस्टैट्स, बेबी मॉनिटर- को इंटरनेट से जोड़ सकते हैं और इस तरह लोगों, प्रक्रियाओं और चीजों के बीच सहज संचार संभव है।
  • कोविड-19 वैक्सीन, अंगों और रक्त के परिवहन सहित वैक्सीन के लिए यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यूएसबी के आकार की डिवाइस, एम्बिटैग एक बार रिचार्ज होकर पूरे 90 दिन के लिए किसी भी टाइम जोन में -40 से +80 डिग्री तक के वातावरण में निरंतर तापमान दर्ज करती है।
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उपलब्ध इस तरह की डिवाइस सिर्फ 30-60 दिनों तक की अवधि के लिए तापमान दर्ज करती हैं।

जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा- राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के नए अध्यक्ष

  • सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
  • प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय नियुक्ति समिति ने उनकी नियुक्ति की है। वहीं महेश मित्तल कुमार और  राजीव जैन आयोग के अन्य सदस्य बनाये गए हैं।
  • न्यायाधीश एचएल दत्तू के दिसंबर 2020 में सेवानिवृत होने के पश्चात राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का अध्यक्ष पद छह माह से खाली था।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नरायण सिंह वाले  पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कार्यदल को 31 मई को हुई बैठक  में नियुक्ति को मंजूरी दी गयी।

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग

  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन 12 अक्तूबर, 1993 को हुआ था। आयोग का अधिदेश, मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 द्वारा यथासंशोधित मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 में निहित है।
  • राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग का गठन पेरिस सिद्धांतों के अनुरूप है जिन्हें अक्तूबर, 1991 में पेरिस में मानव अधिकार संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए राष्ट्रीय संस्थानों पर आयोजित पहली अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला में अंगीकृत किया गया था तथा 20 दिसम्बर, 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा संकल्प 48/134 के रूप में समर्थित किया गया था।
  • यह आयोग, मानव अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के प्रति भारत की चिंता का प्रतीक अथवा संवाहक है।
  • मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम की धारा 12 (1)(घ) में मानव अधिकारों को संविधान द्वारा गारंटीकृत अथवा अंतरराष्ट्रीय प्रसंविदाओं में समाविष्ट तथा भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय व्यक्ति के अधिकारों के रूप में परिभाषित किया गया है।

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