डेली करंट अफेयर्स 31 मई 2021

वैज्ञानिकों ने तैयार किया ‘डार्क मैटर’ का मैप

  • संयुक्त राज्य अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खगोलविदों की एक टीम ने न्यूरल नेटवर्क-आधारित डीप लर्निंग पद्धति और स्थानीय ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं की स्थिति और वेग पर डेटा का उपयोग करके एक नया डार्क-मैटर वितरण मानचित्र बनाया है।
  • डार्क मैटर के मानचित्र ने स्थानीय ब्रह्मांड में ज्ञात प्रमुख संरचनाओं को क्रमिक रूप से पुनः प्रस्तुत किया, जिसमें लोकल शीट-Local Sheet (मिल्की-वे युक्त अंतरिक्ष का एक क्षेत्र, स्थानीय समूह में आस-पास की आकाशगंगाएं, और विर्गो क्लस्टर में आकाशगंगाएं) और लोकल वॉयड (लोकल शीट के बगल में अपेक्षाकृत एक खाली क्षेत्र) शामिल हैं।
  • ब्रह्मांड में 80 प्रतिशत पदार्थ डार्क मैटर के रूप में है जिसमें बड़े पैमाने की संरचना का कंकाल शामिल है जिसे ‘कॉस्मिक वेब’ (Cosmic web) कहा जाता है।
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक चूंकि कॉस्मिक वेब गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से आकाशगंगाओं और अंतर-गैलेक्टिक मीडिया में सभी पदार्थों की गति को निर्देशित करता है, इसलिए बड़े पैमाने पर संरचना का अध्ययन करने के लिए डार्क मैटर के वितरण को जानना आवश्यक है।
  • हालांकि, ब्रह्मांडीय वेब की विस्तृत संरचना अज्ञात है क्योंकि इसमें डार्क मैटर और गर्म अंतर-गैलेक्टिक मीडिया का प्रभुत्व है, और दोनों का पता लगाना मुश्किल है।
  • अध्ययन में, डॉ. जियोंग और उनके सहयोगियों ने एक मॉडल बनाने के लिए मशीन लर्निंग का उपयोग करते हुए एक पूरी तरह से अलग दृष्टिकोण लिया, जो डार्क मैटर के वितरण का पूर्वानुमान करने के लिए आकाशगंगाओं के वितरण और गति के बारे में जानकारी का उपयोग करता है।
  • उन्होंने आकाशगंगा सिमुलेशन के एक बड़े सेट का उपयोग करके अपने मॉडल का निर्माण किया और प्रशिक्षण किया। इस मॉडल को ‘इलस्ट्रिस-टीएनजी’(Illustris-TNG)  कहा जाता है, जिसमें आकाशगंगा, गैस, अन्य दृश्य पदार्थ, साथ ही साथ डार्क मैटर शामिल हैं।
  • उन्होंने विशेष रूप से मिल्की वे की तुलना में नकली आकाशगंगाओं का चयन किया और अंततः पहचान की कि डार्क मैटर वितरण की भविष्यवाणी करने के लिए आकाशगंगाओं के किन गुणों की आवश्यकता है।

क्या है डार्क मैटर?

  • अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार बिग बैंग के बाद प्रथम 150 मिलियन वर्षों तक कोई आकाशगंगा या तारे या ग्रह नहीं थे। ब्रह्मांड विशिष्टताविहीन था।
  • जैसे-जैसे समय बीतता गया, पहले तारे बनते गए। तारें आकाशगंगाओं में एकत्रित होने लगे। फिर आकाशगंगाएं क्लस्टर बनाते चले गये। ये क्लस्टर आकाशगंगाओं और आकाशगंगाओं के बीच की सभी सामग्रियों से बने हैं। बाद में पदार्थ के गुच्छे आपस में टकरा गए, और फिर हमारे सौर मंडल के ग्रह सूर्य के चारों ओर बनने लगे।
  • गुरुत्वाकर्षण रूपी गोंद हमारे सौर मंडल, आकाशगंगाओं और आकाशगंगाओं के क्लस्टर को एक साथ जोड़कर रखे हुये हैं।
  • कुछ क्लस्टर में, आकाशगंगाओं के बीच की जगह इतनी गर्म गैस से भरी होती हैं, कि वैज्ञानिक इसे दृश्य प्रकाश दूरबीनों का उपयोग करके नहीं देखे सकते हैं। गैस को केवल एक्स-रे या गामा किरणों के रूप में देखा जा सकता है। वैज्ञानिक उस गैस को देखते हैं और मापते हैं कि क्लस्टर्स में आकाशगंगाओं के बीच कितनी सामग्रियां या  पदार्थ है। ऐसा करने के दौरान ही वैज्ञानिकों ने पाया कि क्लस्टर्स में जितना हम पता लगा सकते हैं उससे कहीं पांच गुना अधिक सामग्री होनी चाहिए। जिस अदृश्य पदार्थ का हम पता नहीं लगा सकते उसे ‘डार्क मैटर’ कहा जाता है।
  • स्विस खगोलशास्त्री फ्रिट्ज ज्विकी ने 1930 के दशक में पहली बार ‘डार्क मैटर’ शब्द का इस्तेमाल किया था। उन्होंने तथाकथित कोमा आकाशगंगा समूह का अध्ययन किया और पता लगाया कि  यह कितनी तेजी से घूमता है। (Source: NASA)

 ओडिशा में ब्लैकबक संख्या दोगुणी हुयी

  • ओडिशा के मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) द्वारा हाल ही में जारी नवीनतम गणना के आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में ओडिशा की काले हिरण (ब्लैकबक) की आबादी दोगुनी हो गई है।
  • जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, ब्लैकबक की संख्या 7,358 थीं जिनमें 4,196 मादाएं, 1,712 नर और 1,450 वयस्क हैं।
  • ब्लैकबक वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1992 में संशोधित) के अनुसार अनुसूची-1 का जानवर है और इसे आईयूसीएन की रेड सूची में ‘वल्नेरेबल’ माना गया है। 
  • ब्लैकबक ओडिशा राज्य के दक्षिणी भाग में केवल गंजाम जिले में पाए जाते हैं, जहां पर गणना की गई थी।
  • उल्लेखनीय है कि इसे वर्ष 2012-13 तक पुरी जिले के बालूखंड -कोणार्क वन्यजीव अभयारण्य में देखा जाता था, लेकिन अब यह इस क्षेत्र से गायब हो गया है।
  • गंजाम के लोग उत्साहपूर्वक पश्चिमी राजस्थान के बिश्नोई और सौराष्ट्र के ‘वाला’ राजपूतों की तरह ब्लैकबक की रक्षा कर करते रहे हैं।
  • ब्लैकबक को ओडिशा और गंजाम में ‘कृष्णसारा मृग’ के नाम से जाना जाता है। (स्रोतः डाउन टू अर्थ)

क्रिस्टीन एलिजाबेथ वर्मुथ अमेरिकी सेना की पहली महिला सचिव

  • क्रिस्टीन एलिजाबेथ वर्मुथ (Christine  Elizabeth Wormuth ) को अमेरिकी सीनेट ने 27 मई को अमेरिकी सेना की पहली महिला सचिव ( first female secretary of the US Army) के रूप में पुष्टि की ।
  • वह अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन द्वारा पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) की शीर्ष भूमिका के लिए नामित दूसरी महिला हैं। रक्षा उप सचिव कैथलीन हिक्स हैं।
  • वह अमेरिकी इतिहास में सेना के शीर्ष असैनिक पद तक पहुंचने वाली वाली पहली महिला हैं। वह बाइडेन  प्रशासन की पेंटागन ट्रांजीशन  टीम की सदस्या भी थीं।
  • उन्होंने ओबामा प्रशासन के दौरान 2014 से 2016 तक – पेंटागन में नीति के लिए रक्षा के अवर सचिव के रूप में भी कार्य किया है।

HRMN 99: स्व-परागण करने वाली सेब की एक नई किस्म

  • स्व-परागण करने वाली सेब की एक नई किस्म-एचआरएमएन 99 (HRMN 99) हिमाचल प्रदेश के एक किसान ने  विकसित की है, जिसमें फूल आने और फल लगने के लिए लंबी अवधि तक ठंडक की जरूरत नहीं होती है।
  • सेब की इस किस्म का प्रसार भारत के विभिन्न मैदानी, उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में हो गया है, जहां गर्मी के मौसम में तापमान 40-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।
  • सेब के इस की किस्म की व्यावसायिक खेती मणिपुर, जम्मू, हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में शुरू की गई है और इसमें फल लगने का विस्तार अब तक 23 राज्यों और केन्द्र – शासित प्रदेशों में हो चुका है।
  • हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के पनियाला गांव के एक प्रगतिशील किसान श्री हरिमन शर्मा, जिन्होंने सेब के इस नए किस्म – एचआरएमएन 99 को विकसित किया है, इससे न केवल इलाके के हजारों किसानों बल्कि बिलासपुर और राज्य के अन्य निचले पहाड़ी जिले – जहां के लोग पहले कभी सेब उगाने का सपना नहीं देख सकते थे – के बागवानों के लिए भी प्रेरणा के स्रोत बन गए हैं।

युवा-प्रधानमंत्री योजना की शुरुआत

  • शिक्षा मंत्रालय के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने युवा लेखकों को  प्रशिक्षित करने के लिए युवा – प्रधानमंत्री योजना की शुरुआत की।
  • यह युवा और नवोदित लेखकों (30 वर्ष से कम आयु) को प्रशिक्षित करने के लिए एक लेखक परामर्श कार्यक्रम है, जिससे पढ़ने, लिखने और पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके व वैश्विक स्तर पर भारत और भारतीय लेखन को प्रदर्शित किया सके।
  • युवा (YUVA: Young, Upcoming and Versatile Authors) की शुरुआत युवा लेखकों को भारत के स्वतंत्रता संघर्ष के बारे में लिखने के लिए प्रोत्साहित करने के दृष्टिकोण से आरम्भ की गयी है। 
  • इसके लिए कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में शिक्षा मंत्रालय के तहत नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत संरक्षण के सुव्यवस्थित चरणों के तहत इस योजना के चरणबद्ध निष्पादन को सुनिश्चित करेगा।
  • इस योजना के तहत तैयार की गई पुस्तकों का प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत करेगा।

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