करंट अफेयर्स डेली (28 मई 2021)

कोविड-19 कृषि संकट व लोकलसमाधान

वर्ष 2020 में भारत में जब कोविड-19 पैंडेमिक की प्रथम लहर  का सामना किया था तब यह बड़े शहरी इलाकों तक सीमित था। ग्रामीण इलाके लगभग अछूता रहा। यही वजह थी कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तीव्र गिरावट दर्ज होने के बावजूद कृषि क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।

  • जैसा कि ऊपर कहा गया कि वर्ष 2020 में, कोविड 1.0 लॉकडाउन के दौरान, ग्रामीण क्षेत्र काफी हद तक अप्रभावित रहा।
  • कृषि आपूर्ति श्रृंखला में मुद्दों को तेजी से सुलझाया गया था।
  • शहर से गांव वापस लौटे प्रवासियों को रोजगार गारंटी कार्यक्रम, मनरेगा ने रोजगार का बेहतर अवसर उपलब्ध कराया गया जिससे ग्रामीण मांग और अर्थव्यवस्था को गतिमान रखने में मदद मिली।

कोविड-2 का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

  • परंतु कोविड-2 पैंडेमिक का भारत के ग्रामीण इलाकों को भी गहन रूप से प्रभावित किया है।
  • इस बार गांवों और छोटे शहरों में बड़े शहरी केंद्रों की तुलना में अधिक मामले दर्ज किए गए और ग्रामीण क्षेत्रें में दैनिक संक्रमण अपना विकराल रूप धारण कर लिया।
  • ऐसे में कृषि जो अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है, पीड़ित होना तय है।

स्थिति चिंताजनक क्यों?

  • स्थिति चिंताजनक इसलिए है क्योंकि कृषि देश के 42 प्रतिशत से अधिक कार्यबल का प्रतिनिधित्व करती है।
  • कृषि देश की 1.3 बिलियन से अधिक की आबादी को खिलाती है।
  • कृषि कई उद्योगों को इनपुट की आपूर्ति सुनिश्चित करती है, और देश के सबसे बड़े उपभोक्ता वर्ग के लिए आय का स्रोत भी है।
  • माना जा रहा है कि कोविड 2.0 को कम होने में अधिक समय लगेगा, फलस्वरूप कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो इसका ग्रामीण और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी स्थायी प्रभाव पड़ सकता है।
  • सरकार के प्रोत्साहन और उपभोक्ताओं के सकारात्मक दृष्टिकोण ने 2020 के अंत में शहरी मांग को बढ़ा दिया, लेकिन इस साल इसकी संभावना नहीं है। पिछले साल देश भर में लॉकडाउन लगाया गया था। इस साल, हालांकि, राज्य लॉकडाउन का प्रबंधन कर रहे हैं। कठोरता और अवधि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग होती है, और आर्थिक प्रभाव भी कमजोर होंगे, लेकिन अधिक गंभीर होंगे।

आपूर्ति श्रृंखला के भी प्रभावित होने के आसार

  • यह भी कहा जा रहा है कि कोविड की दूसरी लहर न केवल कृषि गतिविधियों बल्कि आपूर्ति श्रृंखला को भी प्रभावित कर रहा है।
  • कोविड की प्रथम लहर के पश्चात सभी खेतिहर मजदूर काम पर नहीं लौटे थे; उनमें से कुछ हाल हालिया विधानसभा चुनावों में वोट देने के लिए रहे गये थे और कुछ लोग होली और ईद जैसे त्योहार मनाने के लिए घर चले गये।
  • खेतों से उनकी अनुपस्थिति से परिचालन प्रभावित हुआ है और खरीफ की बुवाई में देरी हो रही है।
  • कृषि उपज विपणन समितियों (एपीएमसी) की अधिकांश मंडियां खामोश हैं, और कृषि-इनपुट व्यवसाय ठप हो गया है।
  • हालांकि मानसून के सामान्य रहने की भविष्यवाणी की गई है, जो शुभ संकेत है, लेकिन जिस तरह से कोरोनावायरस की दूसरी लहर ने ग्रामीण इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लिया है इस बात की पूरी संभावना है कि ऽरीफ फसलों की बुवाई में देरी होगी और वर्ष के लिए 2021-22 ऽरीफ खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य के नहीं प्राप्त करने की भी आशंका है।
  • उत्पादन गिर गया है, आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है, और मांग कम हो रही है, और इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ सकता है।

क्या है समाधान?

  • सरकार को अपने ऑपरेटिंग मॉडल का विकेंद्रीकरण करना चाहिए, और प्रत्येक भौगोलिक, क्लस्टर या क्षेत्र के लिए अलग-अलग निर्णय लेने, उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला रणनीतियों का उपयोग करना चाहिए।
  • ‘स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा दें’, ‘स्थानीय बेचें’ और ‘स्थानीय का उपभोग करें’ का मंत्र अपनाने की जरूरत है।
  • इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण बिहार ने प्रस्तुत किया है जहां के बागवानी विभाग ने  राज्य भर में लीची और आम बेचने के लिए इंडिया पोस्ट के साथ सहयोग किया। इस पहल से स्थानीय किसानों को लाभ हुआ और उपभोक्ताओं को उनके पसंदीदा उत्पादों की उचित मूल्य पर डिलीवरी सुनिश्चित हो सकी।

बुद्ध की सबसे बड़ी लेटी हुयी प्रतिमा 

  • बेसक दिवस (बुद्ध पूर्णिमा) के अवसर पर  बिहार के बोधगया में बुद्ध अंतर्राष्ट्रीय कल्याण मिशन मंदिर में भारत की सबसे बड़ी ‘बुद्ध की लेटी हुई प्रतिमा’ (Reclining Buddha) प्रस्थापित की जानी थी परन्तु कोविड -19 प्रतिबंधों के कारण इसे टाल दिया गया। 
  • बुद्ध की यह मूर्ति 100 फुट की विशाल फाइबरग्लास से निर्मित है। 
  • बुद्ध की लेटी हुयी मूर्ति या छवि उनके मृत्युशय्या यानी परिनिर्वाण  का प्रतिनिधित्व करती है। बौद्ध धर्म में परिनिर्वाण मृत्यु के बाद महान मोक्ष का चरण  है।
  • उल्लेखनीय है कि बुद्ध की मृत्यु कुशीनगर में तब हुई जब वे 80 वर्ष के थे।
  • बुद्ध की अंतिमअवस्था की मूर्तियों और छवियों में उन्हें अपनी दाहिनी ओर लेटा हुआ दर्शाया गया है।  यह सांकेतिक मुद्रा यह  यह दर्शाने के लिए है कि सभी प्राणियों में जागृत होने और मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त होने की क्षमता है।
  • बुद्ध की लेटी हुयी मूर्ति को पहली बार गांधार कला में चित्रित किया गया था। 
  • दुनिया में सबसे बड़ी ‘बुद्ध की लेटी हुयी मूर्ति’  600 फुट का विनसिन ताव्या बुद्ध है जिसे 1992 में म्यांमार के मावलमाइने में बनाया गया था।

मेकेदातु बांध पर समिति का गठन

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के दक्षिण क्षेत्र ने कर्नाटक के मेकेदातु में कावेरी नदी पर एक जलाशय के निर्माण में मानदंडों के कथित उल्लंघन पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए एक समिति का गठन किया है।
  • कर्नाटक सरकार ने मेकेदातु में कावेरी नदी पर एक बांध बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस परियोजना का उद्देश्य बेंगलुरू महानगर क्षेत्र और इसके आसपास के क्षेत्रों (4.75 टीएमसी) को पेयजल सुविधाएं प्रदान करना और अतिरिक्त लाभ के रूप में 400 मेगावाट बिजली उत्पन्न करना है।
  • दूसरी और तमिलनाडु का कहना है कि कावेरी बेसिन में कर्नाटक द्वारा बांध का प्रस्ताव उसके डेल्टा किसानों को उनके पानी के सही हिस्से से वंचित करेगा।
  • आरोप लगाया जा रहा है कि  एक बार पूरा हो जाने के बाद  बांध का कावेरी वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के आरक्षित वनों पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि 5,252.40 हेक्टेयर भूमि का बड़ा हिस्सा जलमग्न क्षेत्र के रूप में प्रभावित होने की संभावना है।
  • यह भी कहा जा रहा है कि इस बांध के लिए वन संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 के तहत भी कोई मंजूरी या आवश्यक मंजूरी प्राप्त नहीं की गई है। 

गालापगोस द्वीप समूह में विलुप्त विशाल कछुआ की खोज

  • कैलिफोर्निया एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने इक्वाडोर के गालापगोस द्वीप समूह (Galápagos Islands) पर एक ऐसा विशाल कछुआ पाया है जिसके बारे में माना जाता रहा है कि यह 100 साल से भी पहले विलुप्त हो गया था।
  • आनुवंशिक परीक्षण द्वारा इस एकल मादा कछुए की प्रजाति की पहचान चेलोनोइडिस फैंटास्टिकस (Chelonoidis phantasticus) से हुई है।
  • वैज्ञानिकों ने 1906 के बाद से कछुआ की इस प्रजाति को नहीं देखा था।  इस कछुआ को  वर्ष 2019 में फर्नांडीना द्वीप (Fernandina Island) पर पाया गया था।
  • गालापगोस द्वीप समूह प्रशांत महासागर में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर है।
  • उल्लेखनीय है कि गालापगोस द्वीप के फिंच पक्षी ने चार्ल्स डार्विन को 1835 में ‘प्राकृतिक चयन’ के विकासवादी सिद्धांत के लिए प्रेरित किया था।

प्रोफेसर सी.एन.आर. राव को अंतर्राष्ट्रीय एनी पुरस्कार 2020

  • भारत रत्न प्रोफेसर सी.एन.आर. राव को अक्षय ऊर्जा स्रोतों और ऊर्जा भंडारण में अनुसंधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय एनी पुरस्कार 2020 (International Eni Award 2020) प्राप्त हुआ है।
  • इस पुरस्कार को एनर्जी फ्रंटियर पुरस्कार भी कहा जाता है। इसे ऊर्जा अनुसंधान क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार माना जाता है।
  • प्रोफेसर राव पूरी मानव जाति के लाभ के लिए ऊर्जा के एकमात्र स्रोत के रूप में हाइड्रोजन ऊर्जा पर काम कर रहे हैं।
  • एनी अवार्ड्स 2020 रोम के क्विरिनल पैलेस में 14 अक्टूबर, 2021 को आयोजित एक आधिकारिक समारोह के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।
  • ऊर्जा और पर्यावरण अनुसंधान के क्षेत्र में वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त इस पुरस्कार का उद्देश्य ऊर्जा स्रोतों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा देना और शोधकर्ताओं की नई पीढ़ियों को उनके काम के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • यह एनी वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के महत्व का गवाह है। इस पुरस्कार में नगद राशि और विशेष रूप से ढाला गया स्वर्ण पदक शामिल है।

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एनडीएचएम) की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।
  • प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2020 को, अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन के दौरान, एनडीएचएम के शुभारंभ की घोषणा की थी।
  • इस मिशन को छह केन्द्रशासित प्रदेशों में शुरू किया गया है।
  • अब तक, लगभग 11.9 लाख स्वास्थ्य पहचान – पत्र (आईडी) बनाये जा चुके हैं और 3106 डॉक्टरों एवं 1490 स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी सुविधाओं ने इस प्लेटफार्म पर पंजीकरण कराया है।

(The End)

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