करंट अफेयर्स डेली (26 मई 2021)

चक्रवाती तूफ़ान यास एवं तौकाते

  • भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न चक्रवाती तूफ़ान “यास”  को “अति गहन चक्रवात* का दर्जा दिया था। 
  • चक्रवात ‘यास ‘ को इसका नाम ओमान से मिला है। इस शब्द की उत्पत्ति फारसी भाषा में हुई है और अंग्रेजी में इसका अर्थ है चमेली का फूल ।
  • तूफान ‘तौकाते’: इससे पूर्व 16-17 मई को देश के पश्चिमी तट पर चक्रवाती तूफान ‘तौकाते’ (Tauktae) ने कहर बरपाया। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पूर्व अरब सागर के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बन रहा था, जिस वजह से लक्षद्वीप, केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और गुजरात के कई इलाकों में भारी बारिश हुई।
  • ‘तौकाते’ अरब सागर में विकसित होने वाला हाल के वर्षों में लगातार चौथा चक्रवात था, वह भी प्री-मानसून अवधि (अप्रैल से जून) में। 2018 के बाद से इन सभी चक्रवातों को या तो ‘गंभीर चक्रवात’ या उससे ऊपर की श्रेणी में रखा गया था।
  • चक्रवाती तूफान को ‘तौकाते’ नाम म्यांमार ने दिया था । यह वर्ष 2021 का पहला चक्रवाती तूफान था। तौकाते’ का अर्थ होता है, अत्यधिक आवाज करने वाली छिपकली।

चक्रवातों का नामकरण कैसे?

  • भारतीय मौसम विभाग उत्तरी हिंद महासागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवाती तूफानों को नाम देता है, जब उसका पूर्वानुमान बताता है कि लगातार तीन मिनट तक कम से कम 63 किमी प्रति घंटे पवन वेग  विक्षोभ से  चक्रवाती तूफान में बदल गया है।
  • भारत, बांग्लादेश, म्यांमार, पाकिस्तान, मालदीव, ओमान, श्रीलंका, थाईलैंड, ईरान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन सहित 13 देशों के पैनल उत्तरी हिन्द महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के नाम का सुझाव देते हैं । 2020 में, नामों की एक नई सूची जारी की गई जिसमें चक्रवातों के 169 नाम थे, जिनमें 13 देशों के 13 नामों का सुझाव दिया गया था।

चक्रवातों के नाम के लिए क्या मानदंड हैं?

निम्नलिखित मानदंडों को ध्यान में रखते हुए नामों का चयन किया जाता है:

  • नाम लैंगिक, धर्म, संस्कृति और राजनीतिक रूप से तटस्थ होना चाहिए
  • आपत्तिजनक नहीं होना चाहिए, या किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए
  • संक्षिप्त, उच्चारण में आसान होना चाहिए 
  • अधिकतम लंबाई आठ अक्षर की होनी चाहिए
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए इन नामों की एक सूची पिछले साल मई में तबाही मचाने वाले अम्फान के साथ समाप्त हो गई थी। नई सूची अप्रैल 2020  को जारी की गई थी। 
हरिकेन, चक्रवात और टाइफून में क्या अंतर हैं?
हरिकेनहरिकेन उष्णकटिबंधीय तूफान हैं जो उत्तरी अटलांटिक महासागर और पूर्वोत्तर प्रशांत के ऊपर बनते हैं।
चक्रवातदक्षिण प्रशांत और हिंद महासागर के ऊपर चक्रवात बनते हैं।
टाइफूनटाइफून उत्तर पश्चिमी प्रशांत महासागर के ऊपर बनते हैं।

(Sources: Indian Express, BBC and The Hindustan Times)

RSMC | Regional Meteorological Centre Kolkata

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एटी’1 बॉण्ड पर प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण का निर्णय

  • एटी -1 (AT-1: additional tier-1) बॉन्ड मामले में यस बैंक के लिए एक अस्थायी राहत प्रदान करने हुये ‘प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण’ (Securities Appellate Tribunal: SAT) ने ‘भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड’ (सेबी) के पहले के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है।
  • -सेबी ने अपने आदेश में यस बैंक पर 25 करोड़ रुपये का और उसके तीन कार्यकारी पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
  • अप्रैल 2021 में, सेबी ने यस बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों पर तब जुर्माना लगाया, जब इसकी जांच में पाया गया कि निजी बैंक ने संस्थागत निवेशकों से व्यक्तिगत निवेशकों को एटी-1 बांड बेचने की सुविधा प्रदान की। सेबी ने पाया कि एटी-1 बांड की बिक्री की प्रक्रिया के दौरान व्यक्तिगत निवेशकों को इन बांडों की सदस्यता में शामिल सभी जोखिमों  के बारे में सूचित नहीं किया गया था।

क्या होते हैं एटी-1 बॉण्ड?

  • एटी-1, एडिशनल टियर-1 बांड के लिए संक्षिप्त नाम है।
  • यह एक प्रकार का असुरक्षित, दीर्घकालीन बांड है जो बैंक बेसल-3 मानदंडों को पूरा करने के लिए अपने मूल पूंजी आधार को बढ़ाने के लिए जारी करते हैं।
  • ये बांड सदा के लिए यानी परपेचुअल होते हैं और इनकी कोई परिपक्वता तिथि नहीं होती है।
  • परिपक्वता तिथि के बजाय, वे कॉल विकल्प रखते हैं जो बैंकों को पांच या 10 वर्षों के बाद उन्हें रिडीम करने की अनुमति देते हैं। लेकिन बैंक इस कॉल विकल्प का उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं हैं और इन बांडों पर अनंत काल के लिए केवल ब्याज का भुगतान करने का विकल्प चुन सकते हैं।
  • एटी-1 बांड जारी करने वाले बैंक किसी विशेष वर्ष के लिए ब्याज भुगतान से पल्ला झाड़ सकता है।
  • भारत में, लाए गए प्रमुख नए नियमों में से एक यह था कि बैंकों को अपने जोखिम-भारित ऋणों के न्यूनतम अनुपात 11.5 प्रतिशत पर पूंजी बनाए रखना चाहिए। इसमें से 9.5 फीसदी टियर-1 कैपिटल में और 2 फीसदी टियर-2 में होना चाहिए। टियर -1 पूंजी इक्विटी और स्थायी पूंजी के अन्य रूपों को संदर्भित करती है जो बैंक के पास रहती है, क्योंकि जमा और ऋण अंदर और बाहर होते रहेते हैं।

क्या है प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (एसएटी)?

  • प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (Securities Appellate Tribunal: SAT) भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992 की धारा 15के के प्रावधानों के तहत स्थापित एक वैधानिक निकाय है, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड या किसी निर्णायक अधिकारी द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपीलों को सुनने और निपटाने के लिए है।
  • केंद्र सरकार द्वारा 27 मई, 2014 को जारी अधिसूचना के परिणामस्वरूप, एसएटी को पीएफआरडीए अधिनियम, 2013 के तहत पेंशन निधि नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) द्वारा पारित आदेशों केखिलाफ अपील की सुनवाई और निपटान का अधिकार भी दिया गया है।
  • इसके अलावा 23 मार्च, 2015 को एसएटी बीमा अधिनियम, 1938 के तहत भारतीय बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) द्वारा पारित आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई और निपटान का अधिकार भी एसएटी को दिया गया।

17+1 सहयोग मंच

  • बाल्टिक देश लिथुआनिया ने  मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों के साथ चीन के 17+1 सहयोग मंच को छोड़ने की घोषणा की है।  इस मंच में  यूरोपीय संघ के अन्य सदस्य भी शामिल हैं।
  • लिथुआनिया  ने यूरोपीय संघ के साथी सदस्यों से “चीन के साथ अधिक प्रभावी 27 + 1 दृष्टिकोण और संचार” का अनुशरण करने का आग्रह किया।
  • चीन और 17 मध्य और पूर्वी यूरोपीय देशों (जिसे China-CEEC 17+1 के नाम से भी जाना जाता है) के बीच सहयोग ढांचा 2012 में चीन की पहल पर स्थापित किया गया था।
  • एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया बाल्टिक सागर के पूर्वी तट पर स्थित देश हैं। 

मिजोरम में अफ्रीकी वायलेट्स प्रजाति की खोज

  • भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (IISER) भोपाल के शोधकर्ताओं ने मिजोरम और म्यांमार के आस-पास के क्षेत्रों में अफ्रीकी वायलेट्स (African Violets) परिवार से संबंधित पौधों की एक नई प्रजाति की खोज की है।
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि इस अध्ययन से पता चलता है कि भारत के उत्तरपूर्वी हिस्सों की जैव विविधता का अध्ययन पूरी तरीके से नहीं किया गया है और पौधों की कई प्रजातियां अनदेखे रह गई हैं।
  • डिडिमोकार्पस (Didymocarpus) प्रजाति , गेस्नेरियासी (आमतौर पर ‘अफ्रीकी वायलेट्स’ के रूप में जाना जाता है) परिवार से संबंधित एक जीनस है और इसके सदस्यों को पश्चिमी हिमालय से सुमात्रा तक देखा जा सकता है। इन प्रजातियों में से अधिकांश  स्थानिक हैं और जीवित रहने के लिए विशेष पर्यावासों की आवश्यकता होती है। इस जीनस की वर्तमान में 106 ज्ञात प्रजातियां हैं, जिनमें से 26 भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में मौजूद हैं।

मालदीव के अड्डू शहर में भारत का नया वाणिज्य दूतावास

  • केन्द्रीय सरकार ने  2021 में मालदीव के अड्डू शहर (Addu City) में भारत के एक नए वाणिज्य दूतावास को खोलने की मंजूरी दी हैI 
  • भारत और मालदीव के बीच प्राचीन काल से ही जातीय, भाषाई, सांस्कृतिक, धार्मिक और व्यापारिक संबंध बने रहे हैंI भविष्य के लिए भारत की दूरगामी सोच में “पड़ोस पहले नीति” (Neighbourhood First Policy) और :एसएजीएआर (SAGAR: Security and Growth for All in the Region) ‘क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा एवं विकास’ के तहत मालदीव का प्रमुख स्थान हैI 
  • अड्डू शहर में नया वाणिज्य दूतावास खोलने से मालदीव में भारत की राजनयिक उपस्थिति और बढ़ेगी और इससे वर्तमान संबंधों और आकांक्षाओं को सुदृढ़ बनाया जा सकेगाI

देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन

  • कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी 2020-21 के लिए प्रमुख कृषि फसलों के उत्पादन का तीसरा अग्रिम अनुमान  के अनुसार देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 30.544 करोड़ टन रहने का अनुमान है, जो 2019-20 के दौरान हुए कुल 29.75 करोड़ टन खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में 79.4 लाख टन ज्यादा है।  
  • वर्ष 2020-21 के दौरान चावल का कुल उत्‍पादन रिकॉर्ड 12.146 करोड़ टन रहने का अनुमान है। यह विगत 5 वर्षों के 11.244 करोड़ टन औसत उत्‍पादन की तुलना में 90.1 लाख टन अधिक है।
  • वर्ष 2020-21 के दौरान गेहूं का कुल उत्‍पादन रिकॉर्ड 10.875 करोड़ टन अनुमानित है। यह विगत पांच वर्षों के 10.042 करोड़ टन औसत गेहूं उत्‍पादन की तुलना में 83.2 लाख टन अधिक है।

कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय मिशन

  • केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने “कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय मिशन” (National Mission on use of Biomass in coal based thermal power plants) स्थापित करने का निर्णय लिया है। 
  • खेतों में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करने और ताप विद्युत उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए इस मिशन की परिकल्पना की गई है। 
  • इस मिशन के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:
    • ताप विद्युत संयंत्रों से कार्बन न्यूट्रल बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा पाने के लिए को-फायरिंग के स्तर को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़ाकर उच्च स्तर तक ले जाना।
    • बायोमास पेलेट में सिलिका, क्षार की अधिक मात्रा को संभालने के लिए बॉयलर डिजाइन में आर एंड डी (अनुसंधान एवं विकास) गतिविधि शुरू करना।
    • बायोमास पेलेट एवं कृषि अवशेषों की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने और बिजली संयंत्रों तक इसके परिवहन की सुविधा देना।
    • बायोमास को-फायरिंग में नियामक मुद्दों पर विचार करना।

The End

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