करंट अफेयर्स डेली (25 मई 2021)

विगत कई वर्षों में महानदी में घड़ियाल प्राकृतिक प्रजनन के दृष्टांत

  • विगत कई दशकों के अंतराल के पश्चात ओडिशा के सतकोसिया गॉर्ज में महानदी नदी के ताजे पानी में लुप्तप्राय घड़ियाल प्रजाति का प्राकृतिक अवस्था में ब्रीडिंग देखी गई है।
  • घड़ियाल आबादी के कायाकल्प में जुटे  अधिकारियों और अनुसंधान दल द्वारा एक घोंसले से कम से कम 28 बच्चों को देखा गया है।
  • सतकोसिया अभयारण्य के बलदामारा क्षेत्र में हैचलिंग को देखा गया।
  • उल्लेखनीय है कि घड़ियाल का जनसंख्या प्रजनन कार्यक्रम 1972 में शुरू किया गया था। हालांकि प्राकृतिक प्रजनन अगले दो से तीन वर्षों तक जारी रहा परंतु 1975 के बाद बंद हो गया।
  • महानदी नदी में मगरमच्छ की दो प्रजातियाँ हैं – मुगर और घड़ियाल।
  • हाल के वर्षों में घड़ियाल आबादी की निगरानी पर विशेष बल दिया गया। वर्ष 2007 में सतकोसिया को बाघ अभयारण्य घोषित किया गया और 2014 में कोर क्षेत्र की सुरक्षा में वृद्धि हुई जिससे सतकोसिया गार्ज को मछली पकड़ने से मुक्त क्षेत्र बना दिया गया।
  • वहीं सतकोसिया गार्ज में घड़ियाल की आबादी में खतरनाक गिरावट के पश्चात सतकोसिया और नंदनकानन चिड़ियाघर के अधिकारियों ने 2019 में महानदी में इसकी आबादी बढ़ाने के लिए एक खाका  तैयार किया।
  • नंदनकानन से  30 उप-वयस्क घड़ियालों को चरणबद्ध तरीके से गॉर्ज में छोड़ने का निर्णय लिया गया। हालांकि अब तक लगभग 13 ही जीवित रहने में सफल रहे हैं।
  • घड़ियाल कभी भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी भाग में बहने वाली बड़ी नदियों में व्यापक रूप से पाया जाता था। इनमें भारत, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान की सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और महानदी-ब्राह्मणी-बैतरणी नदी प्रणालियां शामिल थीं। यह भी माना जाता है कि यह म्यांमार की इरावदी नदी में भी पायी जाती थी।
  • परंतु आज, इसकी प्रमुख आबादी गंगा नदी की तीन सहायक नदियों तक सीमित रह गईं हैं: भारत में चंबल और गिरवा नदियां और नेपाल में राप्ती-नारायणी नदी।
  • भारत के तीन घड़ियाल रिजर्व तीन राज्यों – उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में स्थित हैं।
घड़ियाल के बारे में
एक सामान्य घड़ियाल की लंबाई 12 से 15 फीट और वजन 2,000 पाउंड तक होता है।
घड़ियाल अपने शरीर के तापमान को गर्म करने या नियंत्रित के लिए धूप सेंकने हेतु जमनी पर आती हैं, अन्यथा यह ताजे पानी में ही चहलकदमी करती हैं।
प्रकृति के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ यानी आईयूसीएन ने घड़ियाल को क्रिटिकली एंडैंजर्डके रूप में  वर्गीकृत किया है। इसके सामने सबसे बड़ा ऽतरा मानवीय गतिविधियों से जुड़ा है।
भारत के वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 की अनुसूची-1 में इसे शामिल किया गया है जिसका मतलब है कि इसका शिकार नहीं किया जा सकता।

भारत में  2020-21 के दौरान  अब तक का सर्वाधिक  प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रवाह

  • सर्वा‍धिक 81.72 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश:  भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान अब तक का सर्वा‍धिक 81.72 अरब अमेरिकी डॉलर का कुल एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) प्रवाह आकर्षित किया है और यह पिछले वित्त वर्ष 2019-20 में आकर्षित किए गए कुल एफडीआई (74.39 अरब अमेरिकी डॉलर) की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक है।  
  • एफडीआई इक्विटी प्रवाह में पिछले वर्ष वित्त वर्ष 2019-20 (49.98 अरब अमेरिकी डॉलर) की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 (59.64 अरब अमेरिकी डॉलर) में 19% की वृद्धि दर्ज की गई है। 
  • सिंगापुरसे सर्वाधिक निवेश: शीर्ष निवेशक देशों की दृष्टि से वित्त वर्ष 2020-21 में ‘सिंगापुर’ 29% के साथ शीर्ष पर है, इसके बाद संयुक्त राज्य अमेरिका (23%) और मॉरीशस (9%) का नंबर आता है।
  • आईटी में सर्वाधिक निवेश: कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर’ वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में लगभग 44% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष सेक्‍टर के रूप में उभर कर सामने आया है। इसके बाद क्रमश: निर्माण (इन्फ्रास्ट्रक्चर या अवसंरचना) गतिविधियों (13%) और सेवा क्षेत्र या सर्विस सेक्‍टर (8%) का नंबर आता है।
  • गुजरात सबसे आगे: ‘कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर’ सेक्‍टर के तहत वित्त वर्ष 2020-21 में प्रमुख एफडीआई प्रवाह प्राप्तकर्ता राज्य क्रमश: गुजरात (78%), कर्नाटक (9%) और दिल्ली (5%) हैं। वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान गुजरात कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 37% हिस्सेदारी के साथ शीर्ष प्राप्तकर्ता राज्य है। इसके बाद क्रमश: महाराष्ट्र (27%) और कर्नाटक (13%) का नंबर आता है। वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान गुजरात में अधिकांश इक्विटी प्रवाह ‘कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर’ (94%) और ‘निर्माण (अवसंरचना) गतिविधियां’ (2%) सेक्‍टरों में हुआ है। 
  • प्रतिशत वृद्धि के मामले में सऊदी अरब  शीर्ष देश: वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान इक्विटी प्रवाह में प्रतिशत वृद्धि की दृष्टि से शीर्ष 10 देशों में सऊदी अरब शीर्ष निवेशक है। सऊदी अरब ने पिछले वित्त वर्ष में किए गए 89.93 मिलियन अमेरिकी डॉलर की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान 2816.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया। वित्त वर्ष 2019-20 की तुलना में वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान क्रमशः अमेरिका और ब्रिटेन से एफडीआई इक्विटी प्रवाह में 227% और 44% की उल्‍लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। 

नासा का वाइपरमिशन

  • संयुक्त राज्य ‘नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन’ यानी नासा वर्ष 2023 में चंद्रमा पर पानी और अन्य संसाधनों की खोज  करने की योजना बना रहा है।
  • -अमेरिकी एजेंसी, अपने आर्टेमिस कार्यक्रम के हिस्से के रूप में, चंद्रमा की सतह पर और उसके नीचे बर्फ और अन्य संसाधनों की तलाश में 2023 के अंत में चंद्रमा पर अपना पहला मोबाइल रोबोट भेजने की योजना बना रही है।
  • -इस रोवर मिशन को ‘वोलेटाइल्स इनवेस्टिगेटिंग पोलर एक्सप्लोरेशन रोवर’ यानी वाइपर (Volatiles Investigating Polar Exploration Rover, or VIPER) नाम दिया गया है।
  • -यह मिशन भावी मानव अभियानों के उपयोग के लिए संसाधनों की प्राप्ति में सहायक होगा।
  • आर्टेमिश कार्यक्रमः नासा आर्टेमिश कार्यक्रम के तहत चंद्रमा की सतह पर प्रथम महिला एवं प्रथम अश्वेत मानव को उतारने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बन्नी घासभूमि से अतिक्रमण हटाने का आदेश

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने छह महीने के भीतर गुजरात के बन्नी घास के मैदानों से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया और एक संयुक्त समिति को एक महीने में एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।
  •  बन्नी घास के मैदान खानाबदोश चरवाहा समुदाय ‘मालधारी’ के लिए प्रसिद्ध है। यहां के संरक्षित झाड़ी-सवाना पर इनकी आजीविका निर्भर है।
  •  ‘बन्नी पशु उच्छेरक मालधारी संगठन’ ने पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील बन्नी इकोसिस्टम में अतिक्रमण के खिलाफ याचिका दायर की थी।
  • बन्नी घास का मैदान 2,618 किलोमीटर में फैला हुआ है और गुजरात में लगभग 45 प्रतिशत चारागाह है। इसमें लगभग 40,000 की आबादी वाली 19 पंचायतों में संगठित 48 बस्तियां/गांव शामिल हैं। 

क्यासानूर वन रोग पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षण

  • क्यासानूर वन रोग (Kyasanur Forest disease: KFD), जिसे मंकी फीवर भी कहा जाता है, के तेजी से निदान में एक नया पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षण अत्यधिक संवेदनशील पाया गया है।
  • आईसीएमआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी द्वारा विकसित, इस तरह के पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षणों का उपयोग केएफडी के निदान के लिए फायदेमंद होगा क्योंकि इसका प्रकोप मुख्य रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में होता है, जहां अच्छी तरह से सुसज्जित नमूना हैंडलिंग और प्रयोगशाला परीक्षण सुविधाओं की कमी है।
  • क्यासानूर वन रोग की पहचान सबसे पहले कर्नाटक में शिमोगा जिले के क्यासानूर जंगल में 1957 में बंदरों की मृत्यु की जांच के दौरान हुई थी।
  • यह रोग क्यासानूर वन रोग वायरस के कारण होता है, जो मुख्य रूप से मनुष्यों और बंदरों को प्रभावित करता है।

कुनो राष्ट्रीय उद्यान में अफ्रीकी चीता

  • मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park ) को भारत की पहली अंतराष्ट्रीय  बड़ी बिल्ली पुनर्वास परियोजना (India’s first inter-country big cat relocation project) के हिस्से के रूप में अफ्रीकी चीता प्राप्त होंगे।
  • मध्य प्रदेश सरकार को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से इसकी मंजूरी मिली है।
  • दक्षिण अफ्रीका के लुप्तप्राय वन्यजीव ट्रस्ट (ईडब्ल्यूटी) द्वारा पांच नर चीता और तीन मादाओं को दान दिया जाएगा।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने जनवरी 2020 में इस परियोजना को मंजूरी दी थी और चीता पुन: वापसी परियोजना (cheetah re-introduction project) पर एनटीसीए का मार्गदर्शन करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।
  • 750 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में फैले चंबल क्षेत्र में स्थित कुनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता के लिए अनुकूल वातावरण है।
  • उल्लेखनीय है कि चीता दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला भू-जानवर है।
  • भारत में अंतिम चित्तीदार चीता की 1947 में छत्तीसगढ़ में मृत्यु हो गई थी और 1952 में इसे भारत में विलुप्त घोषित कर दिया गया था।

जेन गुडऑल को टेंपलटन पुरस्कार 2021

  • यूनाइटेड किंगडम की विश्व-प्रसिद्ध नैतिकताविद् और संरक्षणवादी  जेन गुडऑल (Jane Goodall) को वर्ष 2021 का टेंपलटन पुरस्कार (2021 Templeton Prize) से सम्मानित किया है।
  • 87 वर्षीया गुडऑल से यह पुरस्कार जीतने वाली केवल चौथी महिला है।
  • टेंपलटन पुरस्कार दिवंगत निवेशक और परोपकारी सर जॉन टेम्पलटन द्वारा स्थापित किया गया है।
  • ब्रह्मांड के भीतर मानव जाति के स्थान और उद्देश्य का पता लगाने के लिए विज्ञान का अभिनव उपयोग करने हेतु टेंपलटन पुरस्कार दिया जाता है ।
  • पुरस्कार के तहत  1.5 मिलियन डॉलर से अधिक की राशि प्रदान की जाती है।

बिहार से जीआई प्रमाणित फल  शाही लीची का निर्यात

  • बिहार का जीआई प्रमाणित फल  शाही लीची की इस मौसम की पहली खेप 24 मई 2021 को  हवाई मार्ग से ब्रिटेन को निर्यात की गई।
  • शाही लीची के निर्यात के लिए पादप-स्वच्छता प्रमाणन पटना में नव स्थापित प्रमाणन सुविधा से जारी किया गया। इस फल को बिहार स्थित मुजफ्फरपुर के किसानों से प्राप्त किया गया और सिरा इंटप्राइजेज इसका निर्यात कर रहा है। वहीं लीची का आयात लंदन के एचएंडजे वेज कर रहा है। लीची के जीवन की अवधि कम होने के चलते प्रसंस्कृत और मूल्य-वर्धित उत्पादों के लिए निर्यात के अवसरों का पता लगाने की जरूरत है।
  • बिहार के जीआई प्रमाणित उत्पाद: जरदालू आम, कतरनी चावल और मगही पान के बाद साल 2018 में जीआई प्रमाणन प्राप्त करने वाला शाही लीची बिहार से चौथा कृषि उत्पाद था। शाही लीची के लिए जीआई पंजीकरण मुजफ्फरपुर स्थित लीची ग्रोअर्स एसोसिएशन ऑफ बिहार को दिया गया।
  • उत्पादन क्षेत्र: बिहार के मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, चंपारण, बेगूसराय जिले और आसपास के क्षेत्रों में शाही लीची की बागवानी के लिए अनुकूल जलवायु है।
  • विश्व में स्थान: चीन के बाद भारत विश्व में लीची का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। लीची का पारदर्शी, स्वादिष्ट बीजचोल या खाने योग्य गुदा भारत में एक टेबल फ्रूट के रूप में लोकप्रिय है। वहीं चीन और जापान में इसे सूखे या डिब्बाबंद रूप में पसंद किया जाता है। बिहार लीची के उत्पादन मामले में अव्वल है।

(Sources: The Hindu, The New Indian Express, The Hindustan Times, PIB, Down To Earth, )

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