करंट अफेयर्स डेली (24 मई 2021)

व्यक्तिगत गारंटर भी दिवाला और दिवालियापन संहिता के अधीन-सर्वोच्च न्यायालय

  • सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि कर्जदार कंपनी के प्रमोटरों, प्रबंध निदेशकों और अध्यक्षों के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही शुरू कर सकते हैं, जिन्होंने कॉरपोरेट ऋण पर व्यक्तिगत गारंटी पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • -शीर्ष अदालत ने 21 मई, 2021 को केंद्र सरकार की ‘दिवाला और दिवालियापन संहिता (इनसॉल्वेंसी एवं बैंकरप्सी कोड-आईबीसी)’ के तहत जारी नवंबर 2019 की अधिसूचना को ‘कानूनी और वैध’ करार दिया।
  • -उपर्युक्त कदम कंपनी के प्रमोटरों को उनके कार्यों के लिए अधिक उत्तरदायी बनाने और किसी विशेष परियोजना के लिए कर्ज प्राप्त कर उसे किसी अन्य परियोजना में लगाने की कुप्रवृत्ति पर विराम लगाने में मदद मिलेगी।
  • उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की वर्ष 2019 की अधिसूचना के खिलाफ 75 प्रमोटरों ने देश के विभिन्न उच्च-न्यायालयों में याचिका दायर की थी। विभिन्न उच्च-न्यायालयों में दायर याचिकों को सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पास मंगवाकर सुनवाई आरंभ की थी। उपर्युक्त निर्णय इसी सुनवायी के पश्चात आया है।
  • याचिकाकर्ताओं में उद्योगपति अनिल अंबानी, वेणुगोपाल धूत, कपिल वधावन, संजय सिंघल और अतुल पुंज शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक कॉर्पाेरेट ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटर के रूप में सामने आये थे।
  • वर्ष 2019 की अधिसूचना ने प्रमोटर को ऋण के उस हिस्से के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी बनाने की मांग की गई थी, जो दिवाला के तहत कंपनियों के रिसोल्युशन प्रस्ताव में बकाया था।
  • सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मतलब है कि अगर किसी कंपनी द्वारा बकाया कर्ज को रिसोल्युशन योजना के तहत नहीं चुकाया जाता है, तो व्यक्तिगत गारंटर न केवल छूट का दावा नहीं कर सकेगा, बल्कि लेनदारों द्वारा खुद  को दिवालियापन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए भी मजबूर किया जा सकता है। 
  • उल्लेखनीय है कि जून 2020 में, भारतीय स्टेट बैंक ने अनिल अंबानी से 1,200 रुपये करोड़ से अधिक की वसूली के लिए एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) मुंबई का रुख किया था क्योंकि उन्होंने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और रिलायंस इंफ्राटेल लिमिटेड को दिए गए ऋण के लिए व्यक्तिगत गारंटी दी थी। 

क्या है एनसीएलटी?

  • केंद्र सरकार ने 1 जून, 2016 को कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18) की धारा 408 के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) का गठन किया है।
  • पहले चरण में कॉरपोरेट मामलों के मंत्रलय ने ग्यारह बेंच, नई दिल्ली में एक प्रिंसिपल बेंच और नई दिल्ली, अहमदाबाद, इलाहाबाद, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, जयपुर, हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई में एक-एक क्षेत्रीय बेंच स्थापित की हैं। इसके बाद कटक, जयपुर, कोच्चि, अमरावती और इंदौर में और बेंच स्थापित की गई हैं।
  • एनसीएलटी द्वारा दिये गये निर्णय को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में चुनौती दी जा सकती है।

(स्रोतः द मिंट एवं इंडियन एक्सप्रेस)

पीवीटीजी डोंगरिया कोंध एवं बोंडा आदिवासी पर कोविड-19 का खतरा

  • हाल की एक रिपोर्ट के अनुसार, कई सामाजिक कार्यकर्त्ताओं और लेखकों ने ओडिशा के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कोविड-19 के कारण डोंगरिया कोंध और बोंडा जैसे ‘पर्टिकुलर्ली वल्नेरेबल ट्राइबल ग्रुप (PVTG: Particularly Vulnerable Tribal Group)  के बीच जानमाल के नुकसान को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।
  • बुद्धिजीवियों के अनुसार राज्य सरकार द्वारा सुझाए गए कोविड-19 के प्रसार को रोकने के उपाय काम नहीं करने वाले क्योंकि होम आइसोलेशन और प्राइवेसी आदिवासी संस्कृति में शायद ही काम करे क्योंकि वे इसके आदि नहीं हैं।
  • डोंगरिया कोंध एक आदिवासी समुदाय जो ओडिशा के नियमगिरि पहाड़ियों के घने जंगलों में रहता है, दक्षिण-पश्चिमी ओडिशा के रायगडा और कालाहांडी जिलों में फैली हुई है।
  • इसी तरह बोंडा आदिवासी समुदाय ओडिशा के मल्कानगिरी जिला में पूर्वोत्तर घाट के कोंडाकाम्बेरू पहाड़ी श्रृंखला के 32 हिलटॉप गांव में निवास करते हैं।
  • उपर्युक्त दोनों आदिवासी समुदायों की एक आदिम जीवन शैली है, जो भौगोलिक रूप से दूसरों से अलग है। उन्हें भारत सरकार से पीवीटीजी का दर्जा दिया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि देश के 18 राज्यों और 1 केंद्र शासित प्रदेश में आदिवासियों के ऐसे 75 समूहों की पहचान की गई है और उन्हें पीवीटीजी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनमें 13 आदिवासी समुदाय ओडिशा के हैं।
  • पीवीटीजी की पहचान करने के चार मानदंड हैं:
    •  पूर्व-कृषि स्तर की तकनीकी,
    • साक्षरता का निम्न स्तर,
    • आर्थिक पिछड़ापन,
    • कम होती या स्थिर आबादी।

(स्रोतः द हिंदू एवं पीआईबी)

सोलर ऑर्बिटर ने पहली बार रिकॉर्ड किया कोरोनल मास इजेक्शन

  • यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ESA) और नासा  का संयुक्त अंतरिक्षयान ‘सोलर ऑर्बिटर’ (Solar Orbiter)  ने पहली बार सौर विस्फोटों यानि कोरोनल मास इजेक्शन (coronal mass ejections), की पहली तस्वीरों कैमरे में कैद किया है।
  • उल्लेखनीय है की इस मिशन को फरवरी 2020 में लॉन्च किया गया था और ये  सूर्य के दो बार काफी नजदीक पहुंचा जिनमें  सबसे करीबी संपर्क 10 फरवरी को हुआ था।  सोलर ऑर्बिटर  के SoloHI उपकरण से कोरोनल मास इजेक्शन को रिकॉर्ड किया गया। 
  • SoloHI का पूर्ण रूप है; सौर ऑर्बिटर हेलियोस्फेरिक इमेजर (Solar Orbiter Heliospheric Imager)।
  • कोरोनल मास इजेक्शन (Coronal Mass Ejections-CMEs) सूर्य के कोरोना से प्लाज्मा और चुंबकीय क्षेत्र के विशाल निष्कासन को कहा जाता है।

माउंट न्यिरागोंगो ज्वालामुखी

  • माउंट न्यिरागोंगो (Mount Nyiragongo) लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में स्थित एक ज्वालामुखी है।
  • मई 2021 के चौथे सप्ताह में यह ज्वालामुखी सक्रिय हो गया था जिसकी वजह से गोमा शहर को खाली करा लिया गया था।
  • इससे पूर्व यह ज्वालामुखी वर्ष 2002 में सक्रिय हुआ था जिसकी वजह से 250 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।

जलयुक्त शिवर योजना

  • केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम एनटीपीसी ने महाराष्ट्र के मौदा में भूजल कायाकल्प परियोजना के माध्यम से अपने प्रचालन क्षेत्र के 150 गांवों तथा इसके आसपास के क्षेत्रों को जल संकट से उबरने में सहायता की है।
  • अपनी सीएसआर (CSR) पहल के एक हिस्से के रूप में, एनटीपीसी मौदा जलयुक्त शिवर योजना, परियोजना की सहायता कर रही है जिसने सफलतापूर्वक मौदा नदी को एक जल अधिशेष तहसील में बदलना संभव बनाया है।
  • यह परियोजना कुछ अन्य संगठनों तथा राज्य सरकार की मदद से आर्ट ऑॅफ लिविंग के महाराष्ट्र विंग द्वारा आरंभ की गई थी।

सुंदरलाल बहुगुणा का निधन

  • पर्यावरणविद् और गांधीवादी  तथा मशहूर चिपको आंदोलन के प्रणेताओं में से एक सुंदरलाल बहुगुणा का 21 मई, 2021 को एम्स, ऋषिकेश में निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे।
  • सुंदरलाल बहुगुणा का जन्म नौ जनवरी सन 1927 को  उत्तराखंड के मरोडा में हुआ था।
  • वह चिपको के संस्थापकों में से एक थे, जो हिमालय के जंगलों को बचाने के लिए 1970 के दशक में पेड़ को गले लगाने  का आंदोलन था ।
  • उन्होंने टिहरी बांध के निर्माण का विरोध किया और बांध के खिलाफ दो लंबी भूख हड़ताल भी की । वह दशकों तक टिहरी गढ़वाल में अपने सिलियारा आश्रम में रहे। उन्होंने टिहरी गढ़वाल में शराबबंदी लागू करने के लिए महिला समूहों, या महिला मंडलों के आंदोलन का भी नेतृत्व किया, जो उस समय उत्तर प्रदेश का हिस्सा था।
  • बहुगुणा को 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। 1981 में, उन्होंने अपने विरोध के बावजूद टिहरी बांध परियोजना को रद्द करने से सरकार के इनकार पर पद्म श्री को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। 
  • पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें  1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 

वन हेल्थ (One Health) का गठन

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एच5एन1, एवियन इन्फ्लूएंजा, एमईआरएस, इबोला, जीका (H5N1, avian influenza, MERS, Ebola, Zika) और संभवत: नोवेल कोरोनावायरस रोग (कोविड-19) जैसे जूनोटिक रोगों (zoonotic diseases) के उद्भव और प्रसार का अध्ययन करने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ पैनल ‘वन हेल्थ’ (One Health) का गठन किया है।
  • पैनल वैश्विक एजेंसियों जैसे संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ), विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (ओआईई) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) को सलाह देगा कि भविष्य में विशेष रूप से जूनोटिक रोगों के प्रकोप को कैसे टाला जा सकता है। 

मार्था कूमी-केन्या की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश

  • केन्या के राष्ट्रपति उहुरू केन्याटा ने मार्था कूमी (Martha Koome) को देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश और न्यायपालिका की प्रमुख नियुक्त किया है।
  • वर्ष 2020 में, जस्टिस कूमी संयुक्त राष्ट्र के केन्या पर्सन ऑफ द ईयर अवार्ड “न्याय प्रणाली में बच्चों के अधिकारों की वकालत के लिए” उपविजेता रही थीं।
  • उन्होंने बच्चों के अधिकारों और कल्याण पर अफ्रीकी संघ की समिति में एक आयुक्त के रूप में भी उन्होंने काम किया है। 

रोम घोषणापत्र

  • इटली की राजधानी रोम में 21 मई को समाप्त हुये ग्लोबल हेल्थ समिट के पश्चात जी-20 देशों ने ‘रोम घोषणापत्र’ जारी किया।
  • -रोम घोषणापत्र में वैश्विक स्वास्थ्य के लिए सतत वित्तपोषण हेतु 16 पारस्परिक सहमत सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता व्यक्त की गई है।

(Source: The Hindu, Indian Express, PIB, The Mint, AIR etc)

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