वीडियो गेम एडिक्सन

वीडियो गेम एडिक्शन

‘‘^^WHO’’ के द्वारा^Gaming* को रोग के तौर पर परिलक्षित करना तथा इससे जुड़ी कुछ असहमति’’

            विश्व स्वास्थ्य संगठन अपने 11वें अतंर्राष्ट्रीय रोग समीक्षा वर्गीकरण मेंगेमिंग या अधिक गेम खेलने की प्रवृति को एक मानसिक अवस्था से जुड़े रोग के तौर पर शामिल करने पर विचार कर रहा है। इस महीने इसकी बैठक होने वाली है।

            इस प्रस्ताव को बहस के लिए रखा गया है। गेम खेलने के एडिक्शन के (Addiction) तौर पर देखा जा रहा है। कुछ दिन पहले एक कैफे में लगातार तीन दिन तक गेम खेलने के बाद एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। इसके अलावा गेम खेलने के कारण परिवार में विखराव और बच्चों के प्रति लापरवाही की भी खबरें रही है। इसके बावजूद आलोचना इसके लिए भी हो रही है कि इन्हें रोग क्यो माना जा रहा है?

            गेमिंग को एक रोग के तौर पर जून में ICD-11 के ड्राफ्ट में शामिल किया गया है। अगर गेमिंग को WHO के द्वारा एक रोग के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है तो यह बहुत सारे देशों  को प्रभावित करेगा तथा इससे जुड़ी हुई इलाज तथा लक्ष्ण पहचानने की तकनीक को विस्तारित करना पड़ेगा।

            भारत के पास भी गेम खेलने वाली आबादी लगातार तेज गति से बड़ी जा रही है। गुगल के द्वारा एक अध्ययन "KPMG" के द्वारा भारत में 290 मिलियन डॉलर का गेम उद्योग बताया जा रहा है। 2021 तक
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विलियन डॉलर तक बढ़ने की संभावना है। एक अध्ययन के यह बताया गया है। कि भारत में 120 मिलियन लोग गेम के नियमित आदत में शुभार है। 2021 तक इसके दुगना  पहुंचने की संभावना है। इसके पीछे का कारण इंटरनेट तक पहुंच तथा सस्ते स्मार्ट फोन की सुविधा का बताया जा रहा है।

            ICD&11 ड्राफ्ट में गेमिंग डिसोर्डर को इस तरह परिभाषित किया गया है। ‘‘गेमिंग व्यवहार का वह पैटर्न (डिजिटल गेमिंग या विडियो गेमिंग) जो गेमिंग अनियंत्रण के उस दौर में ले जाता है जो जीवन में सभी क्रियाओं से अधिक प्राथमिकता गेम खेलने को दिया जाता हैं गेमिंग के इस रफ्तार को बढ़ाते ही चला जाता है तथा इसकी नकारत्मकता को नजर अंदाज कर दिया जाता है। ड्राफ्ट में यह कहा गया है। कि लगातार 12 महीने तक यह आदत अगर लगातार है तो यह रोग के वर्गीकरण में आता है।

विरोध क्यो?

            इसका विरोध नीतिगत तरीके से हो रहा है। कहा जा रहा है कि इसे रोग मानना एक जल्दबाजी भरा कदम होगा। एक शोध पत्र  इसमें 34 संस्थानों के शोध को दर्शाया गया हैं इसमें यह कहा गया है। कि इसे  रोग घोषित करने के लिए एक मजबूत तथ्य की आवश्यकता है। यह पत्र अपना दलील पेश करते हुए कहता है कि बिना तथ्य के इसे रोग मानना बहुत ही बूरे परिणाम को निमंत्रण दे सकता है। प्रस्तुत लेख इस यंत्रकारी प्रवृत्ति के खिलाफ सवाल उठाता है। इसमे यह बिन्दू को 

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