भारत स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला व पर्यावरणीय मंजूरी

भारत स्थित न्यूट्रिनो वेधशाला पर्यावरणीय मंजूरी

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय  की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (इन्फ्रा-2) ने थेनी न्यूट्रिनो प्रयोगशाला को पर्यावरणीय मंजूरी दे दी। एक वर्ष पूर्व ही राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने भारत-आधारित न्यूट्रीनो वेधशाला यानी आईएनओ (India-based Neutrino Observatory: INO) को दी गई पर्यावरण मंजूरी निलंबित कर दिया गया। परंतु एक बार फिर से एनजीटी के फैसले को मंत्रालय ने पलट दिया।

-यह वेधशाला, जो तमिलनाडु के थेनी जिले के बोडी वेस्ट हिल्स में स्थापित होनी है, को केवल कणीय भौतिकी में अनुसंधान के लिए भारत के अभिनव  प्रयास का प्रतीक माना जा रहा है वरन् इसे  उत्कृष्टता के केन्द्रों को पोषित करने की दिशा में भी एक उल्लेखनीय प्रयास माना जा रहा है।

- न्यूट्रीनो उप-परमाणवीय कण हैं जिन्हें पता लगाना बेहद मुश्किल होते हैं।

-प्रयोगशाला  गुफा जमीन के  अंदर 1,300 मीटर की गहराई पर होगी जहां तक पहुंचने के लिए सुरंग होगा। ब्रह्मांडीय  विकिरण की पृष्ठभूमि में इस पर चट्टानी आवरण स्वाभाविक भी है।

विवाद क्यों?

-चूंकि यह परियोजना एक वैश्विक वैश्विक जैव विविधता हॉट स्पॉट के रूप में प्रसिद्ध केरल के पश्चिमी घाट में मठिकेट्टन शोला नेशनल पार्क के नदजीक है। इसी आधार पर इस परियोजना का विरोध किया जा रहा  है।

-केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय  ने इस परियोजना के राष्ट्रीय महत्व को देखते हुयेविशेष मामला के रूप में इसे पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान की है।  वैसे पर्यावरण मंत्रालय ने इसे मंजूरी देते हुये 17 शर्तें भी रखी हैं। मसलन्; इसे अभी तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी लेनी  होगी। इन शर्तों के बावजूद जिस तरीके से पर्यावरणीय मंजूरी दी गई है

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