रक्षा बजट की वास्तविकता व समाधान

रक्षा बजट की वास्तविकता समाधान

        रक्षा पर संसद की स्थायी समिति के साथ सेना के वाइस चीफ ऑफ लेफ्टिनेंट  जनरल सरत चंद की हुई बातचीत के पश्चात रक्षा बजट की वास्तविकता पर बहस छिड़ गयी है।

        एक ओर जहां भारत के शक्तिशाली पड़ोसी देश चीन के रक्षा बजट में 8.1 प्रतिशत का इजाफा हुआ तो दूसरी ओर भारत के रक्षा बजट में कटौती पर चिंताएं जतायी जा रही हैं।

        ऐसा कहा जा रहा है कि लेफ्टिनेंट जनरल शरदचंद ने मेजर जनरल बीसी खंडूरी की अध्यक्षता वाली संसद की स्थाई समिति से कहा कि सेना का 68 प्रतिशत साजो-सामान विंटेज श्रेणी का है। इसका मतलब यह है कि जरूरत के हिसाब ये हथियार काफी पुराने हो चुके हैं। यह भी कि सैन्य आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ रुपये का आवंटन नाकाफी है। उन्होंने यह भी उद्घाटित किया कि चीन से सटी सीमा पर सड़कों और ढांचागत सुविधाओं के लिए सेना की मांग से 902 करोड़ रुपये कम मिले हैं। इसक मतलब यह कि सामरिक क्षेत्रों  में आधारिक संरचना विकास के लिए भी फंड की कमी है। निश्चित रूप से ये स्थिति चिंताजनक है।

आखिर क्या है हकीकत?

1.रक्षा बजट की वास्तविकता जानने के लिए हमें अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट पर भी गौर करना चाहिये। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट  की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत पिछले पांच वर्षों में विश्व में सबसे बड़ा हथियार आयातक था। पूरे विश्व का 12 प्रतिशत हथियार आयात भारत द्वारा किया गया। यहां तक कि रक्षा बजट के मामले में भी यूक्रेन को पीछे छोड़ते हुये भारत पांचवें स्थान पर गया है।

2.अपर्याप्त रक्षा बजट केवल आधुनिकीकरण को वरन् सेना की परिचालन तैयारी (ऑपरेशन रेडिनेस) को भी प्रभावित करता है।

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